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Lucknow News: सूखी पड़ी नहर, सिंचाई का संकट
Mon, 10 Jun 2024 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 10 Jun 2024 12:16 AM IST
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कटरा (श्रावस्ती)। जिले में मौसम का पारा पूरी तरह से गर्म बना हुआ है। जेठ की तपती दोपहरी व गर्म पछुआ हवाएं खेतों की नमी तेजी से कम कर रही हैं। ऐसे में जहां किसान खेत में लगी फसल और नर्सरी को सूखने से बचाने के लिए परेशान हैं। वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में सूखी पड़ी मुख्य सरयू नहर किसानों की दुश्वारी बढ़ा रही है।
मुख्य सरयू नहर शाखा बस्ती दिकौली मेले में आने वाले जायरीनों के लिए गिलौला क्षेत्र तक पानी से लबालब है। जबकि नहर में पानी रोक दिए जाने के कारण गिलौला व उससे आगे क्षेत्र में मुख्य नहर पूरी तरह से सूख चुकी है।
मौजूदा समय देखा जाए तो किसान खेतों में गन्ना, मक्का, मेंथा व सब्जियों सहित धान की नर्सरी लगा चुके हैं। जिन्हें सूखने से बचाने के लिए किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। जेठ की तपती दोपहरी व गर्म पछुआ हवाओं के थपेड़े खेतों की नमी को तेजी से घटा रहे हैं।
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ऐसे में इकौना तहसील क्षेत्र के मोहनीपुर, जमुनहा, कंजडवा, रघुवीर पुरवा, अकबरपुर, ओझा कुट्टी, अमारेभरिया, कल्यानपुर, बेलहा राघव, देसियापुर, रनियापुर, भटपुरवा, जोरडीह आदि गांव के किसान परेशान हैं।
किसान अर्जुन सिंह, राम प्रसाद, दयाराम, दीनानाथ व राम बहोरी शुक्ल का कहना है कि जेठ की तपिश के कारण खेतों की तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। अगल बगल के खेत सूखे होने के कारण नमी तेजी से कम हो रही है। नहर में पानी आ जाए तो किसानों को सहूलियत मिल सकती है। जरूरत के वक्त नहर में पानी न होने से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है।
मौसम की बेरुखी से खेतों में पड़ रहीं दरारें
मई के पहले सप्ताह में ही लगाई जाने वाली धान की नर्सरी इस बार करीब एक माह पिछड़ चुकी है। धान की खेती पिछड़ते देखकर कुछ किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी डाल दी। बनते बिगड़ते मौसम को देखकर किसानों में आस बंधी थी कि थोड़ी-थोड़ी बारिश यदि होती रहेगी तो नर्सरी तैयार हो जाएगी। लेकिन मौसम की बेरुखी से किसान परेशान हैं।
-रसूलपुर के किसान बरसाती लाल का कहना है कि खेती काफी पिछड़ चुकी है। सोचा था कि थोड़ी बहुत सिंचाई व बीच-बीच में होने वाली बारिश से नर्सरी तैयार हो जाएगी। लेकिन कड़ी धूप व पछुवा हवा खेत की नमी को सुखा रही है। ऐसे में नर्सरी सूखने की नौबत आ गई है।
-शिवगढ़ के किसान भवानीदीन वर्मा का कहना है कि धान की नर्सरी पिछड़ते देखकर धान की बुआई तो कर दी थी। लेकिन मौसम की बेरुखी से खेतों में दरार पड़ने लगी है।
-इसी तरह से शायपुर गांव के वीरेन्द्र वर्मा व ओरीपुरवा गांव के रक्षाराम यादव का कहना है कि इस बार धान की फसल तेज धूप के कारण काफी पिछड़ गई है। धान की जो नर्सरी लगाई है उसमें हर दूसरे दिन पानी लगाना पड़ता है। मौसम का रुख देखने से लग रहा है कि इस बार धान की फसल में कहीं नुकसान न हो जाए।
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मुख्य सरयू नहर शाखा बस्ती दिकौली मेले में आने वाले जायरीनों के लिए गिलौला क्षेत्र तक पानी से लबालब है। जबकि नहर में पानी रोक दिए जाने के कारण गिलौला व उससे आगे क्षेत्र में मुख्य नहर पूरी तरह से सूख चुकी है।
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मौजूदा समय देखा जाए तो किसान खेतों में गन्ना, मक्का, मेंथा व सब्जियों सहित धान की नर्सरी लगा चुके हैं। जिन्हें सूखने से बचाने के लिए किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है। जेठ की तपती दोपहरी व गर्म पछुआ हवाओं के थपेड़े खेतों की नमी को तेजी से घटा रहे हैं।
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ऐसे में इकौना तहसील क्षेत्र के मोहनीपुर, जमुनहा, कंजडवा, रघुवीर पुरवा, अकबरपुर, ओझा कुट्टी, अमारेभरिया, कल्यानपुर, बेलहा राघव, देसियापुर, रनियापुर, भटपुरवा, जोरडीह आदि गांव के किसान परेशान हैं।
किसान अर्जुन सिंह, राम प्रसाद, दयाराम, दीनानाथ व राम बहोरी शुक्ल का कहना है कि जेठ की तपिश के कारण खेतों की तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। अगल बगल के खेत सूखे होने के कारण नमी तेजी से कम हो रही है। नहर में पानी आ जाए तो किसानों को सहूलियत मिल सकती है। जरूरत के वक्त नहर में पानी न होने से किसानों में नाराजगी देखी जा रही है।
मौसम की बेरुखी से खेतों में पड़ रहीं दरारें
मई के पहले सप्ताह में ही लगाई जाने वाली धान की नर्सरी इस बार करीब एक माह पिछड़ चुकी है। धान की खेती पिछड़ते देखकर कुछ किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी डाल दी। बनते बिगड़ते मौसम को देखकर किसानों में आस बंधी थी कि थोड़ी-थोड़ी बारिश यदि होती रहेगी तो नर्सरी तैयार हो जाएगी। लेकिन मौसम की बेरुखी से किसान परेशान हैं।
-रसूलपुर के किसान बरसाती लाल का कहना है कि खेती काफी पिछड़ चुकी है। सोचा था कि थोड़ी बहुत सिंचाई व बीच-बीच में होने वाली बारिश से नर्सरी तैयार हो जाएगी। लेकिन कड़ी धूप व पछुवा हवा खेत की नमी को सुखा रही है। ऐसे में नर्सरी सूखने की नौबत आ गई है।
-शिवगढ़ के किसान भवानीदीन वर्मा का कहना है कि धान की नर्सरी पिछड़ते देखकर धान की बुआई तो कर दी थी। लेकिन मौसम की बेरुखी से खेतों में दरार पड़ने लगी है।
-इसी तरह से शायपुर गांव के वीरेन्द्र वर्मा व ओरीपुरवा गांव के रक्षाराम यादव का कहना है कि इस बार धान की फसल तेज धूप के कारण काफी पिछड़ गई है। धान की जो नर्सरी लगाई है उसमें हर दूसरे दिन पानी लगाना पड़ता है। मौसम का रुख देखने से लग रहा है कि इस बार धान की फसल में कहीं नुकसान न हो जाए।