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Lucknow News: फेफड़ों की टीबी की सटीक पहचान के लिए दोहरी जांच जरूरी
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प्रतीकात्मक।
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लखनऊ। फेफड़ों के आसपास होने वाली टीबी की सटीक पहचान के लिए सिर्फ एक जांच पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लोहिया संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के शोध में सामने आया है कि बीमारी की सटीक और विश्वसनीय पहचान के लिए कम से कम दो तरह की जांच बेहद जरूरी है।
लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने 260 मरीजों पर शोध किया, जिसके निष्कर्ष इटली के जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोध के प्रमुख डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि फेफड़े की झिल्ली में पानी भरने की समस्या जिसे प्लूरल इंफ्यूजन कहा जाता है, टीबी और कैंसर दोनों का संकेत हो सकती है। इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी प्रारंभिक जांचों से फेफड़े में पानी की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, पानी भरने के असली वजह का पता लगाने के लिए उस पानी की विस्तृत जांच जरूरी है।
दोहरी जांच की महत्ता: एडीए और सीबीनॉट
शोध में टीबी का पता लगाने के लिए दो प्रमुख जांचों एडीए (एडिनोसीन डीएमीनेट) और सीबीनॉट का उपयोग किया गया। डॉ. अजय वर्मा के अनुसार, सीबीनॉट जांच की विश्वसनीयता लगभग 98.2 प्रतिशत पाई गई, जिसने 260 में से 90 मरीजों में टीबी की पुष्टि की। वहीं, शेष 170 मरीजों के फेफड़ों में पानी भरने के अन्य कारण पाए गए। महत्वपूर्ण बात यह है कि एडीए का स्तर 105 मरीजों में बढ़ा हुआ मिला, जो टीबी होने का एक और संकेत है।
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने 260 मरीजों पर शोध किया, जिसके निष्कर्ष इटली के जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोध के प्रमुख डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि फेफड़े की झिल्ली में पानी भरने की समस्या जिसे प्लूरल इंफ्यूजन कहा जाता है, टीबी और कैंसर दोनों का संकेत हो सकती है। इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, मरीज को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी प्रारंभिक जांचों से फेफड़े में पानी की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, पानी भरने के असली वजह का पता लगाने के लिए उस पानी की विस्तृत जांच जरूरी है।
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दोहरी जांच की महत्ता: एडीए और सीबीनॉट
शोध में टीबी का पता लगाने के लिए दो प्रमुख जांचों एडीए (एडिनोसीन डीएमीनेट) और सीबीनॉट का उपयोग किया गया। डॉ. अजय वर्मा के अनुसार, सीबीनॉट जांच की विश्वसनीयता लगभग 98.2 प्रतिशत पाई गई, जिसने 260 में से 90 मरीजों में टीबी की पुष्टि की। वहीं, शेष 170 मरीजों के फेफड़ों में पानी भरने के अन्य कारण पाए गए। महत्वपूर्ण बात यह है कि एडीए का स्तर 105 मरीजों में बढ़ा हुआ मिला, जो टीबी होने का एक और संकेत है।
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