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गन्ना मूल्य न बढ़ाएं, 15 रुपये प्रति कुंतल दी जाए सब्सिडी

Wed, 25 Nov 2020 11:17 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 25 Nov 2020 11:17 PM IST
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Don't increase sugarcane price, subsidy should be given at Rs 15 per quintal
गन्ना - फोटो : सोशल मीडिया
गन्ना मूल्य निर्धारण से पहले शुगर इंडस्ट्री ने मुख्यमंत्री से रेट नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने सीएम योगी को लिखे पत्र में पिछले सालों के मुकाबले चीनी का परता (शुगर रिकवरी) में गिरावट का तर्क दिया है। मांग की है कि गन्ना मूल्य को पिछले साल के बराबर रखा जाए. चीनी मिलों को 15 रुपये कुंतल सब्सिडी दी जाए और गन्ना मूल्य भुगतान दो-तीन किश्तों में करने की इजाजत दी जाए।
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मौजूदा पेराई सत्र (2020-21) के लिए राज्य सरकार शीघ्र ही गन्ना मूल्य घोषित करने वाली है। इसके लिए 27 नवंबर को मुख्य सचिव आरके तिवारी किसानों व चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ ही शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ बैठक करेंगे। वह सभी पक्षों की राय जानने के बाद गन्ना मूल्य का प्रस्ताव तैयार करेंगे। यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएंगे। मौजूदा पेराई सत्र में जहां किसान गन्ना मूल्य 400 रुपये कुंतल घोषित करने की मांग कर रहे हैं वहीं शुगर इंडस्ट्री ने सरकार से गन्ना मूल्य को पूर्ववत रखने की मांग की है। गौरतलब है कि पिछले दो पेराई सत्रों से गन्ना मूल्य 315 एवं 325 रुपये कुंतल है।
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मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में यूपी शुगर मिल्स एसोएिशन के अध्यक्ष सीबी पटौदिया ने कहा है कि प्रदेश की विभिन्न चीनी मिलों से एकत्र किए गए डाटा के अनुसार पिछले सालों के मुकाबले चीनी परता में 0.5 से लेकर 0.8 प्रतिशत तक की गिरावट है। इसकी वजह जलवायु परिवर्तन मानी जा रही है। पटौदी ने कहा है कि शुगर रिकवरी में गिरावट का रुझान आगे भी जारी रहने का अनुमान है। शुगर रिकवरी में इस गिरावट से चीनी उत्पादन पर 125 से 200 रुपये कुंतल का असर पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि विभिन्न कारणों से चीनी उद्योग पहले से वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। रिकवरी में गिरावट से स्थिति और बिगड़ सकती है।
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खपत घटी, उत्पादन बढ़ने की संभावना:

यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान पेराई सत्र में महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 40 लाख टन बढ़ने की संभावना है। इसके विपरीत कोविड-19 के चलते चीनी की खपत घट रही है। वर्ष 2020-21 की निर्यात नीति की घोषणा में भी देरी हो गई है। इससे चीनी का निर्यात भी कम होगा। इथेनॉल ब्लैडिंग अच्छा कदम है लेकिन इससे शुगर इंडस्ट्री की दिक्कत दूर नहीं होगी। इंडस्ट्री की मांग है कि चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य 3100 रुपये से बढ़ाया जाए, चीनी मिलों द्वारा पावर कारपोरेशन को बेची जाने वाली बिजली की दरें बढ़ाई जाएं, पावर कारपोरेशन से बकाया राशि दिलाई जाए।

16 नवंबर को शुगर रिकवरी
पेराई सत्र                रिकवरी (प्रतिशत में)
2018-19                9.55
2019-20                9.54
2021-21                9.15

पिछले दो सालों से नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य:
गन्ना मूल्य पिछले दो सालों में नहीं बढ़ा है। बिजली, डीजल, कीटनाशक, उवर्रक और लेबर महंगी होने से हर साल गन्ना उत्पादन लागत बढ़ रही है। इसे देखते हुए किसान आकर्षक गन्ना मूल्य की उम्मीद लगाए हुए हैं। किसानों को समय से गन्ना मूल्य भुगतान भी नहीं हुआ है। अभी भी पिछले वर्ष का लगभग 5 हजार करोड़ रुपये गन्ना मूल्य अवशेष है। चीनी का उठान नहीं होने से भी भुगतान की समस्या बढ़ी है।
 
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