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बिजली के उपभोक्ताओं के लिए राहत या आफत, पढ़ें यहां

Thu, 04 Feb 2016 12:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 04 Feb 2016 12:22 PM IST
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domestic electricity rates will not hike

सूबे में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अगले वित्तीय वर्ष में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए सभी श्रेणी के नलकूपों के लिए भी किसी भी तरह की वृद्धि से मुक्त रखा गया है। अलबत्ता अन्य वर्गों के उपभोक्ताओं के लिए जरूर ज्यादा दाम चुकाने होंगे।

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पावर कॉर्पोरेशन ने बुधवार को 2016-17 के लिए टैरिफ प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दिया। इसके तहत शहरी या ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में किसी भी तरह के परिवर्तन की सिफारिश नहीं गई है।
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इसी तरह से गरीब एवं कमजोर (लाइफ लाइन) उपभोक्ताओं को बिजली दरों में भी किसी भी तरह का परिवर्तन प्रस्तावित नहीं किया गया है। औद्योगिक पलायन को रोकने के लिए बड़े उद्योगों की बिजली दरें भी यथावत रखने का प्रस्ताव भेजा गया है।
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अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 5.75 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव दाखिल किया गया है। इस वृद्धि से पावर कॉर्पोरेशन को करीब 2850 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

जबकि, पॉवर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि उसे अपना घाटा पूरा करने के लिए टैरिफ में 28 फीसदी की वृद्धि जरूरत है। यहां बता दें कि पावर कॉर्पोरेशन ने आगामी वर्ष में विजन-2016 के तहत बिजली आपूर्ति 90 हजार मिलियन यूनिट से बढ़ाकर एक लाख पच्चीस हजार मिलियन यूनिट करने का फैसला किया है।

घरेलू कनेक्शन पर खत्म हो फिक्स चार्ज

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नियामक आयोग की ओर से गठित बिजली दर सरलीकरण कमेटी की बुधवार को हुई बैठक काफी गहमागहमी भरी रही। बिजली उपभोक्ताओं ने जहां सिस्टम लोडिंग चार्ज, घरेलू कनेक्शन पर फिक्स चार्ज और कॉमर्शियल कनेक्शन पर मिनिमम चार्ज को खत्म करने की मांग जोरशोर से उठाई, वहीं बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस पर कड़ा एतराज जताया।

नियामक आयोग के निदेशक (टैरिफ) ने सभी पक्षों की बात आयोग के सामने रखने का आश्वासन दिया। बैठक में बिजली कंपनियों और नोएडा पावर कंपनी के प्रतिनिधियों को छोड़कर सभी इस बात पर सहमत थे कि प्रदेश में लगने वाला सिस्टम लोडिंग चार्ज खत्म होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति अलग-अलग है, फिर भी 90 रुपये प्रति किलोवाट की समान दर से फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है।

इसी तरह कॉमर्शियल श्रेणी के उपभोक्ताओं पर मिनिमम गारंटी चार्ज लगाना भी विद्युत संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। नोएडा पावर कंपनी और पावर कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधियों ने एलएमवी-9 कैटेगरी में डिमांड चार्ज का प्रावधान करने की मांग उठाई, जिसका उपभोक्ता प्रतिनिधियों ने विरोध किया।

इस पर ये सभी मामले नियामक आयोग को भेजने का निर्णय किया गया। एमएमवी-2, एलएमवी-4, एचवी-1 और एचवी-2 कैटेगरी को एक करने के मामले में कमेटी ने तय किया कि चूंकि बिजली दर बढ़ोतरी सभी कैटेगरी में अलग-अलग है, इसलिए इस पर विचार किया जाना उचित नहीं है।

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