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डॉक्टरों ने दो सर्जरी कर तीन दिन के मासूम को दुर्लभ बीमारी से बचाया, ये थी चुनौती

Fri, 10 Jan 2020 04:14 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 10 Jan 2020 04:14 PM IST
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doctors saved the life of a newborn baby by two surgery in lucknow
बच्चे की सर्जरी के संबंध में जानकारी देते चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ के डॉक्टरों ने तीन दिन के नवजात की सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी। उसे दुर्लभ बीमारी थी। सिर का कुछ हिस्सा बाहर निकल आया था और रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी थी। यह बीमारी की मूल वजह मां में फोलिक एसिड की कमी होती है। इसका एक मात्र उपचार सर्जरी है।

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अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल के डॉ. सुनील कुमार सिंह व डॉ. प्रार्थना सक्सेना ने तीन दिन पहले सर्जरी कर मासूम को नई जिंदगी दी। उनका दावा है कि इतने छोटे बच्चे की दोनों सर्जरी एक साथ करने की यह पहली घटना है। इस बीमारी को चिकित्सकीय भाषा में सिस्टिक सूजन के साथ स्पाइना बिफिडा कहा जाता है। यह न्यूरल ट्यूब पूरी तरह से बंद नहीं होने से बनता है।
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बस्ती निवासी सुनील की पत्नी संतोषी ने बच्चे के जन्म दिया तो उसके सिर के पीछे सूजन थी, जो डबल सिर जैसी दिख रही थी। उसकी रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी थी। इससे बच्चा असामान्य दिख रहा था। वहां के चिकित्सकों ने तत्काल रेफर कर दिया। सुनील के मुताबिक, वह राजधानी के दो अस्पतालों में गए, लेकिन वहां भर्ती लेने से मना कर दिया गया।
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इस पर अपोलो मेडिक्स हॉस्पिटल पहुंचे, जहां तीसरे दिन बच्चे की सर्जरी हुई। अब बच्चा पूरी तरह से सामान्य है। न्यूरो सर्जन डॉ. सुनील ने बताया कि करीब पांच हजार में से एक केस में न्यूरल ट्यूब बंद हो जाता है, जिससे सिस्टिक सूजन आती है। सर्जरी में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए।

समझिए, क्या है बीमारी

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प्रतीकात्मक तस्वीर
डॉ. सुनील ने बताया कि स्पाइना बिफिडा दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। इसमें रीढ़ की हड्डी असामान्य होती है। इसे स्प्लिट कॉर्ड मॉलफॉर्मेशन भी कहा जाता है। जन्म से पहले मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बीच में कुछ कोशिकाएं फंस जाती है, जिससे ऑक्सिपिटल सिस्ट बन जाते हैं।

जब बच्चा गर्भ में आकार ले रहा होता है तो तीसरे से चौथे हफ्ते के बीच कुछ न्यूरल ट्यूब मिलकर दिमाग और रीढ़ की हड्डी बनाते हैं, लेकिन 5000 में से एक मामले में न्यूरल ट्यूब पूरी तरह बंद नहीं होती हैं, जिससे नाक, आंख के पास या फिर सिर के पीछे की हड्डियां पूरी तरह से जुड़ नहीं पाती हैं। तब दिमाग का कुछ हिस्सा उस जगह में से बाहर आने लगता है।

तीन दिन के बच्चे में आपस में उलझीं रीढ़ की हड्डियों को अलग करना और नर्व को बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। इनके जरा सा प्रभावित होने पर बच्चा अपंग हो सकता था।

इसलिए जरूरी है जल्द सर्जरी

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प्रतीकात्मक तस्वीर
डॉ. प्रार्थना सक्सेना ने बताया स्प्लिट कॉर्ड मॉलफॉर्मेशन (एससीएम) से पीड़ित मरीज जब बड़े होते हैं तो रोगग्रस्त होते हैं। हाथ, पैर, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, रीढ़ का एक ओर का टेढ़ापन, बार बार मूत्र का निकलना व लार टपकना, पैरों का या आधे धड़ का लकवा हो जाने का खतरा रहता है।

न होने दें फॉलिक एसिड की कमी
बीमारी की बड़ी वजह फोलिक एडिस की कमी है। प्रदूषण, अनुवांशिक समस्या, कैंसर की दवाओं के साइड इफेक्ट भी बीमारी की वजहें हैं। फोलिक एसिड के लिए सप्लीमेंट दिए जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड से यह समस्या पता चल जाती है। ऐसे में यूट्रस के अंदर ही माइक्रो सर्जरी से इसे ठीक किया जा सकता है। कुछ दवाओं के जरिये भी इस विकृति को रोका जाता है।
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