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छह दिन की बच्ची के मुंह से निकाला आधा किलो का ट्यूमर

Fri, 18 Dec 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 18 Dec 2015 11:39 PM IST
Doctors remove tumor from a child mouth.

गोरखपुर के राजीव पाठक के आंगन में चार दिसंबर को नन्हीं बिटिया पूजा की किलकारियां गूंजी तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा लेकिन लेबर रूम से बाहर निकलते ही डॉक्टर ने बताया कि उसके मुंह के अंदर से एक ट्यूमर बाहर निकला हुआ है। इसकी वजह से बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। प्रसव कराने वाले चिकित्सकों ने उन्हें बच्ची को तुरंत केजीएमयू ले जाने की सलाह दी।



प्रसव के मात्र आठ घंटे बाद बच्ची को लेकर राजीव पाठक व परिवारीजन केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग पहुंच गए। जहां जन्म लेने के पांच दिन बाद ही एक बड़ी सर्जरी के बाद उसे बचा लिया गया। यह कारनामा किया है पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. जेडी रावत ने।


डॉ. रावत ने बताया कि राजीव पाठक ने पत्नी को प्रसव के लिए एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। सीजेरियन प्रसव के बाद उन्हें बेटी होने की सूचना दी गई। जिसके मुंह से जुड़ा हुआ लगभग आधा किलो का ट्यूमर निकला हुआ था। केजीएमयू लायी गई बच्ची की जांच की गई तो पता चला कि उसे बहुत ही दुर्लभ ट्यूमर है जिसे टेरेटोमा ऑफ टंग या इपिग्नेथस कहते हैं। इस ट्यूमर की वजह से बच्ची मुंह भी नहीं बंद कर पा रही थी। यही नहीं दूध पीने और सांस लेने में भी उसे दिक्कत हो रही थी।
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अस्पताल पहुंचने पर उसके मुंह के अंदर की गंदगी को सक्शन कर साफ किया गया। इसके बाद उसे ऑक्सीजन लगायी गई और नली के माध्यम से दूध पिलाया गया। बच्ची का स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद एमआरआई कराई गई। जिससे ट्यूमर मुंह के अंदर कहां से जुड़ा है, उसका आकार कितना बड़ा है इसका आंकलन हो गया। जांच में पता चला कि ट्यूमर 12 गुणे 10 सेंटीमीटर का और लगभग आधा किलोग्राम वजन का है।

ऑपरेशन में आईं इस तरह की दिक्कतें

Doctors remove tumor from a child mouth.

डॉ. जेडी रावत ने बताया कि पांच दिन की बच्ची को सर्जरी के लिए बेहोश करना सबसे बड़ी चुनौती था। इसीलिए एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों से उसकी जांच कराई गई। मुंह के अंदर ट्यूमर होने के कारण उसकी सांस की नली दिख नहीं रही थी। जिससे बेहोशी देने के लिए पाइप डालने में दिक्कत होती।

किसी तरह एनेस्थेटिस्ट डॉ. हेमलता ने डॉ. रावत के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. जेडी रावत ने बताया कि सर्जरी से पहले तय किया गया कि यदि सांस की नली नहीं मिली तो ट्रैकियास्टमी (गले के रास्ते सांस की नली का रास्ता बनाना) कर उसे बेहोशी दी जाएगी। लेकिन ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद ट्रैकियास्टमी की नौबत नहीं आयी।

दो घंटे चला ऑपरेशन
छह दिन की मशक्कत के बाद नन्हीं पूजा के मुंह से जुड़े ट्यूमर को निकालने के लिए डॉ. जेडी रावत की टीम को दो घंटे लगे। 10 दिसंबर को सर्जरी की तैयारी शुरू हुई। पहली बार में ही उसे एनेस्थीसिया देने में सफलता मिल गई। इसके बाद शुरू हुई बच्ची के मुंह से ट्यूमर निकालने की प्रक्रिया।

मुंह के अंदर व जीभ के पिछले हिस्से से जुड़ा हुआ ‌था ट्यूमर

Doctors remove tumor from a child mouth.

डॉ. जेडी रावत ने बताया कि ट्यूमर बायीं तरफ जीभ के अंदर और मुंह के पिछले हिस्से से जुड़ा हुआ था। सबसे पहले ट्यूमर को खून पहुंचाने वाली नस को बंद किया जाता है। जिससे ट्यूमर काटते ही तेज रक्तस्राव न शुरू हो जाए। एक नवजात में मुश्किल से 250 मिलीलीटर ही खून होता है। यदि एक बार रक्तस्राव शुरू हुआ तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए बहुत अधिक सावधानी बरतनी पड़ी।

खून की आपूर्ति करने वाली नस को बंद करने बाद धीरे-धीरे ट्यूमर को काटकर बाहर निकाल दिया गया। इस पूरे ऑपरेशन में लगभग दो घंटे का समय लगा। सर्जरी के पांच दिन बाद 15 दिसंबर को पूजा को डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. जेडी रावत ने बताया कि बच्ची का तालू कटा हुआ है। उसे नौ से 12 माह का होने पर ठीक किया जाएगा।

दुर्लभ है बीमारी
- 40 हजार से सवा लाख बच्चों में से किसी एक को होता है
- ज्यादातर बच्चियों में होता है टेरेटोमा ऑफ टंग
- ये ट्यूमर अधबने बच्चे की तरह होता है
- हड्डियां, खाल, मांसपेशियां, नर्व, बाल इसमें पाए जाते हैं

सर्जरी करने वाली टीम
पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जेडी रावत, डॉ. सुधीर सिंह, एनेस्थेटिस्ट डॉ. हेमलता, रेजीडेंट डॉ. पियूष, सिस्टर सूसन मेसी।

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