बगैर ओपन सर्जरी के ही बदल दिया खराब वॉल्व
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न पसलियों को जोड़ने वाली हड्डी (स्टर्नम) काटनी पड़ी, न बड़ा चीरा लगाना पड़ा। महज ढाई घंटे में पूरी तरह खराब हो चुके दिल के माइट्रल वॉल्व को केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम ने गुरुवार को बदल दिया।
यह सब कुछ हुआ पसलियों के बीच छेद बनाकर। वह भी महज तीन इंच का। ऑपरेशन के कुछ घंटों में ही मरीज बातचीत करने लायक हो गया।
उसे दो-तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। डॉक्टरों का दावा है कि इस तकनीक से सर्जरी से मरीज 15 दिन में काम करने और साइकिल चलाने लायक हो जाता है। खास बात है कि इस तरह की सर्जरी केजीएमयू में पहली बार हुई है।
केस स्टडी : वॉल्व के दोनों तरफ रिस रहा था खून, जल्द ऑपरेशन की थी जरूरत
कार्डियोवैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग के डॉ. विजयंत देवेनराज के मुताबिक अंबेडकरनगर के मुबारकपुर टांडा का रहने वाला एजाज अहमद (43) दो महीने पहले सांस फूलने और एक कदम चलने में ही थक जाने की शिकायत के साथ पहुंचा।
जांच में पता चला चला कि माइट्रल वॉल्व खराब होकर पूरी तरह सिकुड़ चुका है। इससे वॉल्व के दोनों तरफ खून रिस रहा था। डॉक्टरी भाषा में कहें तो वह ‘सीवियर माइट्रल वॉल्व स्टनोसिस विद सीवियर माइट्रल वॉल्व लीक’ से पीड़ित था। जल्द ऑपरेशन नहीं होने पर जान जाने की आशंका थी।
जानिए क्यों खास है यह सर्जरी
अब तक करते थे : डॉ. विजयंत के मुताबिक ऐसे मामलों में ओपन सर्जरी से ही वॉल्व बदला जाता है। ओपन सर्जरी में पसलियों को आरी से काटना पड़ता है। वॉल्व बदलने के बाद पसलियों को तार से कसना पड़ता है। ऐसे में मरीज को तीन से चार महीने तक करवट बदलने से भी रोका जाता है।
इस केस में किया: इस केस में मिनिमल इनवेसिव सर्जरी यानी कम से कम चीर-फाड़ करने का फैसला किया गया। एजाज के सीने में दाहिने निप्पल के नीचे करीब तीन इंच का छेद किया गया। उसेे हार्ट एंड लंग मशीन पर रखा गया।यानी ऐसी मशीन जो ऑपरेशन के दौरान कृत्रिम हार्ट का काम करती है। इसके बाद वॉल्व तक पहुंच उसे बदल दिया गया।
इस टीम ने की सर्जरी
डॉ. विजयंत देवेनराज, डॉ. विवेक तेवर्सन, डॉ. सर्वेश कुमार
सीनियर रेजीडेंट-डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. प्रदीप सिंह सूदन, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. अजय पांडेय
पर्फ्यूजनिस्ट-मनोज, नवनीत कौर
सिस्टर-एडलीन अहमद, दीपमाला
एनेस्थीसिया फैकल्टी-डॉ. बीबी कुशवाहा
सीनियर रेजीडेंट-डॉ. विजेता महाजन