सरकारी नौकरियों में चार फीसदी आरक्षण का रास्ता साफ, इस वर्ग को मिलेगा ज्यादा फायदा
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उत्तर प्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में चार फीसदी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। इस बारे में राज्य सरकार की ओर से भेजे गए ‘उप्र लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अध्यादेश-2018’ को राज्यपाल राम नाईक ने मंजूरी दे दी है।
मौजूदा समय राज्य विधानमंडल का सत्र न होने के कारण एवं विषय की तात्कालिकता को देखते हुए राज्यपाल ने अध्यादेश को विधिक परीक्षण के बाद अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
इस अध्यादेश के जरिये पूर्व में बनाए गए अधिनियम ‘उप्र लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित और भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अधिनियम-1993’ की कुछ धाराओं में संशोधन किया गया है। इस विषय पर भारत सरकार ने नि:शक्तजन अधिकार अधिनियम-2016 बनाया था।
इस अधिनियम में परिभाषित शारीरिक रूप से नि:शक्त की परिभाषा के अनुसार प्रदेश में प्रभावी अधिनियम में अध्यादेश के माध्यम से शारीरिक रूप से विकलांग की जगह शारीरिक नि:शक्तता के रूप में परिभाषित किया गया है।
लोकसेवाओं और पदों के प्रत्येक समूह में मिलेगा लाभ
इस संदर्भ में अधिनियम 1993 की धारा-3 की उपधारा (1) के खंड (दो) को प्रतिस्थापित कर नि:शक्त लोगों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। लोक सेवाओं और पदों के प्रत्येक समूह में संवर्ग सदस्य संख्या में कुल रिक्तियों की संख्या का 4 प्रतिशत दिव्यांग लोगों से भरा जाएगा।
इसमें (क) दृष्टिहीन और कम दृष्टि, (ख) बधिर और श्रवण शक्ति ह्रास, (ग) प्रमस्तिष्कीय अंगघात, उपचारित कुष्ठ, बौनापन, एसिड आक्रमण पीड़ित और मांसपेशीय दुष्पोषण सहित चलन क्रिया संबंधी नि:शक्तता से ग्रस्त लोगों के लिए एक-एक प्रतिशत तथा (घ) स्वपरायणता, बौद्धिक नि:शक्तता, विशिष्ट अधिगम नि:शक्तता और मानसिक अस्वस्थता, (ड.) खंड (क) से (घ) के अधीन आने वालों में से बहुनि:शक्तता जिसके अंतर्गत हर नि:शक्तता के लिए निर्धारित पदों में बधिर-अन्धता शामिल है, के लिए एक प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।