दिव्यांग बच्चों में छिपी होती है अद्भुत प्रतिभा, समाज को दे सकते हैं नई दिशा: मुख्यमंत्री योगी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दिव्यांग बच्चों में दिव्य प्रतिभा छिपी होती है। इसलिए ऐसे बच्चों को सही समय पर सही दिशा देने की जरूरत है। इन बच्चों की छिपी अद्भुत प्रतिभा को समाज के सामने लाने के लिए सरकार के साथ अभिभावकों को भी प्रयास करना चाहिए।
इसी उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिव्यांग बच्चों को कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें सक्षम बनाया जा रहा है और कई योजनाएं भी शुरू की गईं हैं। सीएम बुधवार को कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर ‘कॉक्लियर इम्प्लांट’ कराने वाले श्रवण बाधित बच्चों व अभिभावकों से संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष 68 बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराने का फैसला किया गया है। सीएम ने विभागीय अधिकारियों से अपील की कि शल्य चिकित्सा योजना के तहत चयनित सभी बच्चों को इस योजना का लाभ तेजी से दिलाएं। दिव्यांगजनों के कल्याण के प्रति सरकार संवेदनशील है। इसी कड़ी में पेंशन राशि को 300 से बढ़ाकर 500 रुपये किया है। मौजूदा समय में प्रदेश में 10 लाख 7 हजार दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ मिल रहा है। इसी तरह पति-पत्नी दोनों के दिव्यांग होने की दशा में दिए जाने वाले प्रोत्साहन राशि को 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये किया गया है।
'श्रवण बाधित बच्चों के कान में कॉक्लियर इम्प्लांट कराया जा चुका है'
दिव्यांगजन कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से संचालित शल्य चिकित्सा योजना के तहत प्रदेश में पिछले साल कुल 20 बच्चों का चयन किया गया था, जिसमें से कुल 11 श्रवण बाधित बच्चों के कान में कॉक्लियर इम्प्लांट कराया जा चुका है।
शेष बच्चों को यह सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। इस साल 159 बच्चों का चयन किया गया है और अब तक 59 बच्चों का ऑपरेशन कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
दिव्यांग होने के बावजूद समाज को दी नई दिशा
पिछले साल कॉक्लियर इम्प्लांट कराने वाले 10 बच्चों को फल और शिक्षा उपयोगी सामग्री देकर प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन को सहायक उपकरण देकर उनके जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।
महर्षि अष्टावक्र, सूरदास, चित्रकूट के जगद्गुरू रामभद्राचार्य और स्टीफन हॉकिंग का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग होने के बाद भी इन महापुरुषों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और समाज को नई दिशा दी।