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Corruption in UP : चहेती कंपनियों के फायदे के लिए नियम-कानून ताक पर, मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन में ‘खेल’
Sun, 05 Jun 2022 05:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 05 Jun 2022 05:15 AM IST
सार
यहां एक्सपायर्ड दवाओं के मामले की अभी जांच चल ही रही थी कि इस बीच उपकरणों की खरीद में चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने का भी खुलासा हुआ है। जिस फर्म के उपकरण को गुणवत्ताविहीन बताकर टेंडर से बाहर कर दिया गया, दोबारा उसी को टेंडर में शामिल कर उपकरण खरीदने की कोशिश की जा रही है। यह खुलासा खुद कॉरपोरेशन की टेक्निकल कमेटी ने किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (यूपीएमएससीएल) में गजब खेल चल रहा है। यहां एक्सपायर्ड दवाओं के मामले की अभी जांच चल ही रही थी कि इस बीच उपकरणों की खरीद में चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने का भी खुलासा हुआ है। जिस फर्म के उपकरण को गुणवत्ताविहीन बताकर टेंडर से बाहर कर दिया गया, दोबारा उसी को टेंडर में शामिल कर उपकरण खरीदने की कोशिश की जा रही है। यह खुलासा खुद कॉरपोरेशन की टेक्निकल कमेटी ने किया है। कमेटी ने पूरे मामले की शिकायत कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक और स्वास्थ्य महानिदेशक से की है।
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प्रदेश के सभी अस्पतालों में ब्लड बैंक हैं और कुछ अस्पतालों में स्थापित किए जा रहे हैं। इन ब्लड बैंकों के लिए उपकरणों की खरीद कॉरपोरेशन के जरिए होती है। उपकरणों की गुणवत्ता की खरीद के लिए टेक्निकल कमेटी बनी हुई है। इस कमेटी में एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान, केजीएमयू और सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी शामिल हैं।
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कमेटी का आरोप है कि कॉरपोरेशन में कार्यरत महाप्रबंधक (इक्यूपमेंट) उज्जवल मानकों को दरकिनार कर मनचाहे तरीके से उपकरण खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं। यह दबाव प्रबंध निदेशक के नाम पर बनाया जाता है। कमेटी ने आरोप लगाया है तकनीकी मूल्यांकन और प्रस्तुतीकरण के आधार पर उपकरणों की खरीद केलिए नवंबर 2021 में तीन फर्म चुनी गईं। इसमें एक फर्म को फाइनल किया गया। लेकिन बाद में कॉरपोरेशन के नियमों का हवाला देकर महाप्रबंधक (इक्यूपमेंट) ने प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। मई 2022 में दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें दो ऐसी फर्म को शामिल कर लिया गया, जिन्हें पहली बार में रिजेक्ट किया गया था।
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जिम्मेदार बोले-कराएंगे जांच
उपकरणों व अन्य सामग्री की गुणवत्ता बनी रहे, इसीलिए कमेटी बनाई जाती है। पत्र मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। नियमों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। जांच कराते हैं।
- डॉ. मुत्थु कुमारस्वामी बी, प्रबंध निदेशक, यूपीएमएससीएल