पूजा-पाठ के बाद शुरू हुआ मेट्रो सुंरग की खुदाई का काम
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मेट्रो सुरंग की खोदाई का सोमवार को गोमती ने श्रीगणेश कर दिया। जिस तरह से दिल्ली में दो टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के नाम जंतर और मंतर रखे गए थे, उसी तरह यहां ये दोनों गंगा और गोमती के नाम से जानी जाएंगी।
फिलहाल लखनऊ की लाइफलाइन गोमती नदी के नाम से पहली टीबीएम ने काम शुरू कर दिया है, जबकि दूसरी देश की सबसे बड़ी नदी गंगा के नाम से खोदाई करने वाली टीबीएम बाद में काम शुरू करेगी।
फिलहाल गोमती सचिवालय से हजरतगंज स्टेशन के बीच खोदाई शुरू कर चुकी है। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के एमडी कुमार केशव ने अपनी टीम और टाटा-गुलेरमैक के अधिकारियों की मौजूदगी में पूजा-पाठ के बाद बटन दबाकर मशीन को ऑन किया।
हालांकि, अभी मशीन को सुरंग के अंदर पूरी तरह घुसने में 10-12 दिन लगेंगे। इसकी वजह टीबीएम का एक दिन में करीब सात मीटर ही खोदाई कर पाना है। अभी सुरंग की खोदाई का काम अप साइड में गोमती (एस-52) टीबीएम कर रही है।
इसके 15 दिन केबाद डाउन लाइन में गंगा टीबीएम अंसेंबल होने के बाद काम करेगी। दिल्ली में विकासपुरी से पालम के बीच मेट्रो रूट की सुरंग की खोदाई में उपयोग हुईं टीबीएम जंतर और मंतर काफी प्रसिद्ध हो गई थीं।
इन दोनों को ऑस्ट्रेलिया की निर्माता कंपनी टेराटेक ने री-फर्बिश किया है। इन्हें दिसंबर में दिल्ली से 24 पहियों के बड़े-बड़े ट्रकों में लखनऊ लाया गया था। इसके बाद सचिवालय स्टेशन पर शाफ्ट में असेंबल किया गया। अब इनका नाम गंगा और गोमती है।
चार महीने पहले शुरू हुआ काम
अधिकारियों का कहना है कि अपने तय समय से पहले सुरंग की खोदाई का काम शुरू कर लिया गया है। कंपनी के चयन के बाद आमतौर पर एक साल का न्यूनतम समय टीबीएम से काम शुरू कराने में लगता है। इसके उलट केवल आठ महीने में ही टीबीएम ने काम शुरू कर दिया है।
जानिए कैसे होगी सुरंग की खोदाई
स्टेप-1
दिल्ली से आई दोनों टीबीएम गंगा और गोमती के पार्ट्स को सचिवालय पर 20 मीटर गहरी शॉफ्ट में 250 टन क्षमता की क्रेन से असेंबल करने के लिए उतारा गया। 6.52 मीटर व्यास की अर्थ प्रेशर बैलेंस (ईपीबी) टीबीएम इसके बाद काम शुरू करेगी। करीब 85 मीटर लंबी गोमती टीबीएम को असेंबल कर सुरंग की खोदाई शुरू की गई है।
स्टेप-2
टीबीएम के अगले हिस्से में कटर हेड लगा है। यह मिट्टी और पत्थर को काटने में सक्षम है। काम को आसान बनाने के लिए टीबीएम को खास ब्लेडनुमा कटर-हेड को 17 इंच चौड़ाई के रोलरनुमा डिस्क से लैस किया गया है। यह कटर हेड सुरंग की खोदाई करते हुए तयशुदा रूट पर आगे बढ़ेगा।
स्टेप-3
खोदाई करके आगे बढ़ने के बाद वृंदावन कास्टिंग यार्ड में बने छल्ले लगाए जाएंगे। यह छल्ले छह अलग-अलग सेगमेंट में बंटे हैं। हर सेगमेंट का डिजाइन जरूरत के मुताबिक अलग होगा।
पूरे छल्ले का वजन करीब 20 टन होता है। लंबाई 1.4 मीटर और व्यास 6.5 मीटर होता है। सेगमेंट का डिजाइन बदलकर इसे सुरंग के मुड़ने की दिशा देने में उपयोग किया जाएगा। एक दिन में पांच छल्ले लगाए जाएंगे। यानी एक सुरंग एक दिन में सात मीटर की खोदाई करेगी। हालांकि, वृंदावन योजना में बने कास्टिंग यार्ड में रोजाना 9-12 छल्लों का निर्माण किया जाएगा।
सुरक्षा का भी होगा पूरा बंदोबस्त
टीबीएम के आगे बढ़ने से पहले छल्लों को दीवार से पूरी तरह फिक्स होने के लिए सुनिश्चित किया जाएगा। एक सेगमेंट में बने छेद से ग्राउटिंग कर सीमेंट भरा जाएगा। यह काम भी टीबीएम का एक पार्ट करेगा। इससे छल्लों और दीवार के बीच खाली जगह नहीं रह जाएगी। इससे सुरंग भविष्य के लिए सुरक्षित हो जाएगी।
स्टेप-5
खोदाई से निकलने वाली मिट्टी को एक बेल्ट की मदद से दूसरे छोर पर लगे मकर्स (एक तरह केओपन बॉक्स) में डाला जाएगा। कटर हेड के खोदाई के समय पानी उपयोग करने की वजह से यह मिट्टी गीली होगी।
इन मकर्स में मिट्टी को लादकर एक 260 टन क्षमता के लोको पायलट से खींचकर बाहर लाया जाएगा। मिट्टी निकालने के लिए आया लोको छह डिब्बों की ट्रेन से मिट्टी निकालेगा। यहां से कंटेनरनुमा ट्रकों में लादकर मिट्टी गोमतीनदी के किनारे भेजी जाएगी।
यह रहेगी कार्ययोजना
- गोमती टीबीएम 07 मीटर सुरंग की खोदाई एक दिन में करेगी।
- दूसरे चरण में सचिवालय से दोबारा हुसैनगंज की तरफ 613 मीटर लंबी सुरंग की खोदाई होगी।
- तीसरे चरण में हुसैनगंज से चारबाग के बीच आगे फिर 419 मीटर खोदाई होगी। दोनों टीबीएम 2019 की शुरू में बाहर निकाली जाएगी।
- 1.8 किमी लंबी दो सुरंग में कुल 2600 छल्ले लगाए जाएंगे।
- कास्टिंग यार्ड में एक समय में करीब 300 छल्लों का स्टॉक रहेगा। हर छल्ले का अलग नंबर होगा।
- खोदाई के साथ ही 27.5 सेमी मोटाई और 1.4 मीटर लंबाई के कंक्रीट के बने छल्लों को लगाया जाएगा।
सुरक्षा का भी पूरा बंदोबस्त
सुरंग की खोदाई के समय बिना टोकन किसी भी स्टाफ को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। वहीं आग लगने, जहरीली गैस फैलने या पानी भरने पर भी मुश्किल से निबटने के लिए टीबीएम को उपकरणों से लैस किया गया है।
स्टाफ के बेहोश होने या फंसने पर तेजी से निकालने के लिए एक रेस्क्यू केज (पिंजरा) भी तैनात रहेगा। सुरंग से निकलने के लिए यह पिंजरा मिट्टी धंसने या पत्थर गिरने से चोट लगने से भी बचाएगा।