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Lucknow News: बच्चों के हक पर निजी स्कूलों की तानाशाही

Sat, 05 Apr 2025 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Apr 2025 02:07 AM IST
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Dictatorship of private schools on children's rights

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लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) हर छात्र का हक है। इसके बाद भी निजी स्कूलों की तानाशाही से बच्चों को दाखिला नहीं मिल पाता है। इन स्थितियों पर शिक्षाधिकारी भी ध्यान नहीं देते हैं। इन्हीं विसंगतियों के चलते वर्ष 2009 में लागू हुए इस अधिनियम के तहत पूरे तीन वर्ष तक एक भी निजी स्कूल प्रबंधक ने बच्चे का प्रवेश नहीं लिया।

वर्ष 2012 में जब अधिनियम का पालन करते हुए शिक्षा विभाग ने गरीब बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिलाने की पहल की तो बहुत हाय तौबा मची। हर साल आवेदन लिए गए, लेकिन निजी स्कूलों के प्रबंधक आरटीई को ठेंगा दिखाते रहे।
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आरटीई के तहत चयनित यदि कोई भी निजी स्कूल प्रबंधक बच्चे का प्रवेश लेने से इन्कार करता है तो उसके विरुद्ध अधिनियम के उल्लंघन की रिपोर्ट शिक्षाधिकारी दर्ज करा सकते हैं। यदि राज्य के बाहर की मान्यता है तो स्कूल की एनओसी रद्द करके मान्यता निरस्त कराई जा सकती है। जुर्माना भी लगाने का विकल्प है। फिर भी कभी सख्ती नहीं हुई।
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जिले में नहीं हुई एक भी कार्रवाई



आरटीई के तहत निजी स्कूल के प्रबंधकों ने छात्रों का प्रवेश नहीं लिया। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बीएसए की ओर से शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन जिले में किसी भी निजी स्कूल पर कार्रवाई नहीं हुई।

राज्य से बाहर की है मान्यता तो जेडी कर सकते कार्रवाई



राज्य से बाहर के बोर्ड की मान्यता यदि किसी विद्यालय की है तो उसकी एनओसी रद्द कराने की कार्रवाई जेडी माध्यमिक की ओर से की जाती है, लेकिन जिले में ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। पूर्व में कई स्कूलों के नाम दिए गए। हर बार नोटिस और चेतावनी तक ही मामला सीमित रहता है।


जिलाधिकारी की सख्ती पर होते हैं प्रवेश



पिछले साल तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने आरटीई के तहत प्रवेश न लेने वाले स्कूलों पर एफआईआर के आदेश दिए थे। इसके बाद सभी ने बच्चों को दाखिला दिया था।
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