डायबिटीज के मरीजों को आसानी हो सकती है ये गंभीर बीमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि किसी को डायबिटीज है तो उसे टीबी होने का खतरा अन्य मरीजों की तुलना में चार गुना ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि टीबी का इलाज करा रहे मरीजों की डायबिटीज जांच अनिवार्य कर दी गई है। इसे पुनरीक्षित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की गाइड लाइन में भी शामिल किया गया है।
टीबी के साथ डायबिटीज है तो उसे भी नियंत्रित किया जाता है। यदि इसे नजरअंदाज कर दें तो टीबी की दवाओं का असर नहीं होता। टीबी नियंत्रण कार्यक्रम जोनल टास्क फोर्स की बैठक के दूसरे दिन नॉर्थ जोन के अध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने ये जानकारी दी।
केजीएमयू के ब्राउन हॉल में हुई बैठक में प्रो.सूर्यकांत ने बताया कि टीबी तीन बीमारियों के साथ हो रही है। इससे मरीज का इलाज प्रभावित हो रहा है। पहले टीबी और एचआईवी साथ-साथ होने का पता चला। एचआईवी मरीजों को टीबी होना आम बात हो गई। जब इसकी जानकारी हुई तो पहले टीबी का इलाज किया गया।
टीबी के मरीजों के लिए डायबिटीज की जांच अनिवार्य
नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी और आरएनटीसीपी ने मिलकर टीबी-एचआईवी से लड़ाई लड़ी। एचआईवी होने पर मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और उसे टीबी जैसे अवसरवादी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह अब टीबी के मरीज में डायबिटीज की जांच कराना अनिवार्य किया गया है।
इसी भी गाइड लाइन में शामिल किया गया है। इसके अलावा टीबी के मरीज के इलाज से पहले उससे गुटखा या सिगरेट का इस्तेमाल करने की जानकारी भी ली जाएगी। तंबाकू का सेवन किसी भी तरीके से करने वाले मरीज को इलाज के दौरान इसे छोड़ना अनिवार्य होगा।
भारत सरकार ने इलाज की गाइड लाइन में इसे शामिल करने का ऑर्डर जारी कर दिया है। जल्दी इसका नोटिफिकेशन कर इलाज में शामिल किया जाएगा।प्रो. सूर्यकांत ने इस मौके पर टीबी बीमारी से जागरूक करने वाली किताब भी नॉर्थ जोन के विभिन्न शहरों से आए 170 चिकित्सकों को बांटी।
यूपी स्टेट टास्क फोर्स के अध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को टीबी नोटिफिकेशन का प्रेजेंटेशन किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 2012 में टीबी को ‘नोटिफिएबल डिजीज’ की श्रेणी में रखा है। इसके तहत टीबी के प्रत्येक रोगी को पंजीकृत करना जरूरी हो गया है।
निजी व सरकारी सभी जगह इलाज कराने वाले टीबी रोगियों का पंजीकरण कर उसकी जानकारी जिला टीबी अधिकारी को देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू के प्रत्येक विभाग में एक डॉट्स वॉलंटियर नियुक्त करने का आदेश जारी हुआ है। इस मौके पर नार्थ जोन टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. डीके भारद्वाज भी मौजूद थे।