फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   dharm sansad meeting will be held after four years

नवंबर में उडुपी से राम मंदिर पर नया शंखनाद, चार साल बाद धर्म संसद की बैठक

Sun, 22 Oct 2017 12:03 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 22 Oct 2017 12:03 PM IST
विज्ञापन
dharm sansad meeting will be held after four years
राम मंदिर - फोटो : self

एक तरफ भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों का खाका खींचने में लगी है तो दूसरी तरफ संघ परिवार के ही संगठन विश्व हिंदू परिषद ने हिंदुत्व के हथियारों को धार देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

विज्ञापन


विहिप ने कर्नाटक के उडुपी में 24 नवंबर से धर्म संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाई है। इसमें मंदिर मुद्दे पर संतों की तरफ से नया शंखनाद होने की संभावना है। गाय और गंगा पर भी आगे की रणनीति तय होगी।
विज्ञापन


सामाजिक समरसता यानी संपूर्ण हिंदू समाज की एकजुटता का एजेंडा भी बैठक के विचारणीय विषयों में शामिल है। इस बैठक के फैसले किसी न किसी रूप में लोकसभा चुनाव 2019 को प्रभावित जरूर करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रमुख शंकराचार्यों, अखाड़ा परिषद, प्रमुख धर्माचार्यों और संतों की मौजूदगी वाली धर्म संसद की यह 15वीं बैठक होगी। पहली बैठक 1989 में प्रयाग में हुई थी, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि के लिए कारसेवा शुरू करने का फैसला किया गया था।

माना जा रहा है कि इस बार भी धर्म संसद मंदिर मुद्दे पर ऐसा आह्वान करेगी जो भगवा टोली के सामने खड़ी चुनौतियों से निपटने में मददगार बने।

इसलिए बैठक हुई खास

2013 में प्रयाग में कुंभ के मौके पर धर्म संसद की बैठक हुई थी। इसमें लोकसभा चुनाव 2014 के मद्देनजर देश में हिंदू निष्ठ सरकार बनाने के लिए जुटने का आह्वान किया गया था। तब धर्म संसद में आए संतों व धर्माचार्यों ने एक स्वर में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग की थी।

संतों ने कहा था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। यह उम्मीद जताई गई थी कि मोदी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार हिंदू स्वाभिमान व सम्मान सुरक्षित करने के साथ देश का भी मान बढ़ाएगी। सीमाओं को सुरक्षित करेगी। अयोध्या, मथुरा व काशी का उनके सांस्कृतिक महत्व के अनुसार विकास होने का भरोसा जताया गया था।

ये भी है एक वजह

पिछली बार धर्म संसद के सामने हिंदुत्व के सरोकारों को संरक्षण देने वालों की सरकार बनवाने की चुनौती थी। इस बार जनता को यह समझाने की जिम्मेदारी है कि जिन अपेक्षाओं पर धर्म संसद ने मोदी व भाजपा के समर्थन में जुटने का फैसला किया था, उन पर काम आगे बढ़ा है।

बचा काम भी जल्द ही पूरा होगा। इस बार धर्म संसद के प्रतिनिधियों की चिंता मोदी सरकार को सत्ता में बरकरार रखने की होगी। इसके लिए ये कुछ ऐसा करना चाहेंगे जो भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में मददगार बने।

इन गतिविधियों ने बढ़ाया महत्व  

इस बीच अयोध्या में जैसी गतिविधियां तेज हुई हैं, उनसे इसका महत्व और बढ़ गया है। पिछले दिनों विहिप के महामंत्री चंपत राय और महामंत्री (संगठन) दिनेश ने अयोध्या स्थित कार्यशाला में जाकर मंदिर निर्माण के लिए तराशे जा रहे पत्थरों को देखा। उन्हें बताया गया कि मंदिर निर्माण में लगने वाले लगभग 1.75 लाख घन फीट पत्थर में एक लाख घन फीट पत्थर की नक्काशी व तराशने का काम हो चुका है। बाद में तय हुआ कि लगभग 500 ट्रक पत्थर अगले कुछ महीनों में और अयोध्या भेज दिया जाएगा। दिवाली बाद कारीगरों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। इससे भी उडुपी बैठक का महत्व समझा जा सकता है।

परिस्थितियां भी कर रहीं संकेत

सर्वोच्च न्यायालय 5 दिसंबर से श्रीराम जन्मभूमि मुद्दे की रोज सुनवाई करने जा रहा है। कई संतों-महात्माओं के अलावा अन्य वर्गों के बीच से मंदिर पर काम शुरू करने की आवाज उठने लगी है। ऐसे में रणनीतिकार चाहते हैं कि धर्म संसद बुलाकर इस मुद्दे पर ऐसी राह निकाली जाए जिससे असहज स्थिति न बनने पाए। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा भी कहते हैं कि संत-महात्मा व श्रद्धालु जल्द से जल्द मंदिर निर्माण होते देखना चाहते हैं। धर्म संसद के एजेंडे में यह मुद्दा प्रमुखता से रहेगा। गाय की रक्षा व गंगा के संरक्षण पर भी बातचीत होगी। सरकार से अपेक्षा की जाएगी कि 2019 में होने वाले अर्धकुंभ के पहले संगम तक तो गंगा की सफाई हो ही जाए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed