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बताया था कैलिफोर्नियम, निकला सल्फर, आयरन, सिलिकॉन और कार्बन का मिश्रण, आईआईटी कानपुर ने जारी की रिपोर्ट
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लखनऊ। पॉलीटेक्निक चौराहे से 28 मई को पुलिस ने आठ लोगों से बरामद जिस पदार्थ को कैलिफोर्नियम होने का दावा किया था, वह जांच में सल्फर, आयरन, सिलिकॉन और कार्बन का मिश्रण निकला। इसका इस्तेमाल गिरोह लोगों को ठगने में करता था। कानपुर के आईआईटी से मंगलवार को इसे लेकर जांच रिपोर्ट जारी की।
प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर प्रशांत कुमार मिश्रा के मुताबिक मंगलवार को आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों व प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर पहुंची पुलिस टीम ने रिपोर्ट हासिल की। इसमें वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ठगों से बरामद धातु कैलिफोर्नियम नहीं है। उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेज दी गई है।
यह था मामला
पॉलिटेक्निक चौराहे पर पुलिस टीम ने ठगों के गिरोह के आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनसे बरामद पदार्थ को ठगों ने कैलिफोर्नियम बताया। पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि यह विश्व की दूसरी सबसे महंगी धातु है। इसकी सत्यता परखने के लिए बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों से संपर्क किया। उनकी राय पर इसे जांच के लिए कानपुर की आईआईटी लैब भेजा गया। करीब आठ दिन तक परीक्षण के बाद तय हुआ कि बरामद पदार्थ कैलिफोर्नियम नहीं है।
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प्रभारी निरीक्षक गाजीपुर प्रशांत कुमार मिश्रा के मुताबिक मंगलवार को आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों व प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर पहुंची पुलिस टीम ने रिपोर्ट हासिल की। इसमें वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ठगों से बरामद धातु कैलिफोर्नियम नहीं है। उच्चाधिकारियों को भी रिपोर्ट भेज दी गई है।
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यह था मामला
पॉलिटेक्निक चौराहे पर पुलिस टीम ने ठगों के गिरोह के आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनसे बरामद पदार्थ को ठगों ने कैलिफोर्नियम बताया। पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि यह विश्व की दूसरी सबसे महंगी धातु है। इसकी सत्यता परखने के लिए बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों से संपर्क किया। उनकी राय पर इसे जांच के लिए कानपुर की आईआईटी लैब भेजा गया। करीब आठ दिन तक परीक्षण के बाद तय हुआ कि बरामद पदार्थ कैलिफोर्नियम नहीं है।
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