लॉकडाउन के बावजूद यूपी ने बनाया रिकॉर्ड, प्रदेश में अब तक 12.16 करोड़ कुंतल चीनी का उत्पादन
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50 दिन से भी ज्यादा लंबे लॉकडाउन के बावजूद उत्तर प्रदेश ने गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। इस बार प्रदेश में गन्ना पेराई व चीनी उत्पादन पिछले साल से ऊपर पहुंच गया है। मई का आधा महीना बीतने के बावजूद 53 चीनी मिलों में पेराई चल रही है।
पिछले साल इस अवधि में मात्र 30 चीनी मिल ही चल रहे थे। प्रदेश में अभी तक 10715 लाख कुंतल गन्ने की पेराई करके 1216 लाख कुंतल से ज्यादा चीनी का उत्पादन हो चुका है। यह पिछले साल से 53 लाख कुंतल ज्यादा है।
मार्च के आखिर में जब गन्ना पेराई का मौसम पीक पर था, तो लॉकडाउन की घोषणा हो गई थी। सरकार ने शुगर इंडस्ट्री को लॉकडाउन से बाहर रखा। गन्ना विकास विभाग ने लॉकडाउन में भी चीनी मिलों के संचालन की प्रभावी कार्य योजना बनाई।
प्रदेश व देश के दूसरे हिस्सों से आपूर्ति होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कराई। इसी के कारण गन्ना पेराई और चीनी उत्पादन में फिर कीर्तिमान बना। गन्ना मंत्री सुरेश राणा का कहना है कि यदि लॉकडाउन में चीनी मिलों का संचालन बंद हो जाता तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। गन्ना खेतों में खड़ा रह जाता।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन की घोषणा के समय ही गन्ना किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा। उनके मागदर्शन के कारण ही रिकॉर्ड गन्ना खरीद हुई और अभी तक पेराई सत्र चल रहा है। सरकार का कहना है कि जब तक किसानों के खेतों में गन्ना खड़ा है, चीनी मिल बंद नहीं होंगी।
46 लाख किसानों को 6.13 करोड़ गन्ना पर्चियां दी गईं
प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी ने बताया कि प्रदेश के 46.2 लाख गन्ना किसानों को मौजूदा पेराई सत्र 2019-20 में अब तक 6.13 करोड़ गन्ना पर्चियां जारी की गई हैं। विगत वर्ष सामान्य परिस्थितियों के बावजूद इस समय तक 5.5 करोड़ गन्ना पर्चियां ही जारी की गई थीं।
चीनी मिलों ने अब तक 10,715.40 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर 1216.8 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया है। पिछले साल 2018-19 में इस समय तक 10,118.77 लाख कुंतल गन्ने की पेराई ही हुई थी, वहीं चीनी उत्पादन 1163.69 लाख कुंतल था।
वर्तमान सत्र में कुल 119 चीनी मिलों ने पेराई कार्य शुरू किए। 66 मिलों की पेराई समाप्त करने के बाद अभी भी 53 चीनी मिलें पेराई कार्य कर रही हैं, जबकि विगत वर्ष इस समय तक केवल 30 चीनी मिलें हीं संचालित थीं।