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देवरिया हत्याकांड: हर कदम पर पुलिस ने बरती लापरवाही, परिवार ने फरवरी में ही कहा था हमें जान का है खतरा
Sat, 07 Oct 2023 10:25 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 07 Oct 2023 10:25 AM IST
सार
सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा करायी गयी इस प्रकरण की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2021 में प्रेम यादव के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था।
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घटना के बाद पुलिस की भूमिका की जांच हो रही है।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
देवरिया में जमीन विवाद में छह लोगों की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। शासन की जांच में सामने आया है कि स्थानीय पुलिस ने इस प्रकरण में तमाम शिकायतों के बावजूद लापरवाही बरती थी। इसी वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को सीओ समेत नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया, जबकि एक पूर्व सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।
सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा करायी गयी इस प्रकरण की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2021 में प्रेम यादव के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने उसके और परिवार के शस्त्र लाइसेंस को निरस्त कराने की कोई कवायद नहीं की।
वहीं, फरवरी 2023 में सत्यप्रकाश दुबे ने स्थानीय पुलिस से प्रेम यादव से उसके पूरे परिवार को जान का खतरा होने की शिकायत की थी। पुलिस ने इस शिकायत को निराधार बताते हुए अपनी रिपोर्ट सीओ को दी, जिन्होंने बिना सत्यता की पड़ताल किए अपने दस्तखत कर दिये।
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वहीं बार-बार दोनों पक्षों के बीच विवाद होने पर पुलिस उनको 107/16 में पाबंद करने से बचती रही। इसकी वजह प्रेम यादव का स्थानीय पुलिस पर प्रभाव माना जा रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा करायी गयी इस प्रकरण की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2021 में प्रेम यादव के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने उसके और परिवार के शस्त्र लाइसेंस को निरस्त कराने की कोई कवायद नहीं की।
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वहीं, फरवरी 2023 में सत्यप्रकाश दुबे ने स्थानीय पुलिस से प्रेम यादव से उसके पूरे परिवार को जान का खतरा होने की शिकायत की थी। पुलिस ने इस शिकायत को निराधार बताते हुए अपनी रिपोर्ट सीओ को दी, जिन्होंने बिना सत्यता की पड़ताल किए अपने दस्तखत कर दिये।
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वहीं बार-बार दोनों पक्षों के बीच विवाद होने पर पुलिस उनको 107/16 में पाबंद करने से बचती रही। इसकी वजह प्रेम यादव का स्थानीय पुलिस पर प्रभाव माना जा रहा है।