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टाइगर के लिये हुई ड्रोन कैमरा की डिमांड!

Sat, 29 Nov 2014 12:41 PM IST
आशुतोष/अमर उजाला, लखनऊ
आशुतोष/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Nov 2014 12:41 PM IST
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Demand of drone camera to catch the tiger.

40 से भी ज्यादा दिनों से 6 जिलों में दहशत मचा रहे टाइगर को खोजने के लिये रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीम ने अब ड्रोन कैमरा की डिमांड कर दी है। टीम को कानपुर में गंगा किनारे के जंगलों में कांबिंग और टाइगर पगमार्क ट्रैकिंग में दिक्कत आ रही है।

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बीते दिनों रेस्क्यू टीम के सदस्यों की हुई ‘टीम मीटिंग’ में ड्रोन की जरूरत पर सहमति के बाद विभाग के आला अधिकारियों से ड्रोन को भी ऑपरेशन में शामिल किये जाने की मांग की गई है। अधिकारी फिलहाल टीम की डिमांड पर चुप्पी साधे हैं।
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भटके हुये बाघ की तलाश में ये पहला मौका है जब टीम ने ड्रोन की डिमांड की है। इससे पहले ऑपरेशन में तब ड्रोन को शामिल करने की बात उठी थी, जब बाघ अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में बीकेटी-माल में गोमती के किनारों पर लुकाछिपी कर रहा था।
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लेकिन बाघ के उन्नाव और उसके बाद कानपुर जाने के बाद इसकी जरूरत अब ज्यादा महसूस की जा रही है। ड्रोन कैमरे से पहले भी टीम ने उन्नाव में ऑपरेशन के दौरान विभाग से नदी के आर-पार आने जाने के लिये स्टीमर नावों की डिमांड की थी, तब भी विभागीय अधिकारी उन्हें मौका पड़ने पर मुहैया कराने का आश्वासन दे रहे थे।

दलदली इलाकों में ढूंढने में हो रही दिक्कत

Demand of drone camera to catch the tiger.

बाघ उन्नाव से निकलने के बाद कानपुर और उसके आगे के इलाकों में गंगा के किनारे ही लगातार मूवमेंट कर रहा है। यहां जंगल के कई इलाकों में जहां दलदली जमीन है। टीम को हाथियों के साथ मूवमेंट करने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

कनवापुर, बड़ा मंगलपुर, नत्थापुरवा, थनिसरांय के जंगलों के अलावा गंगा की तलहटी से सटे नरकुल के जंगलों में मूवमेंट न के बराबर हो पा रही है। लेकिन टीम को बीते दिनों कांबिंग में बराबर टाइगर पगमार्क मिल रहे हैं।

ऐसे में टीम में शामिल विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कम से कम टाइगर न सही भीतर के उन इलाकों में जहां मैनुअली नहीं पहुंचा जा सकता है, कम से कम ड्रोन की मदद से वहां का नजारा तो लिया जा सकता है।

मुरादाबाद में आदमखोर बाघ के ऑपरेशन में उड़ चुका है ड्रोन
इस साल की शुरुआत में सर्दियों में मुरादाबाद, बिजनौर में भटके आदमखोर बाघ के मामले में ड्रोन का प्रयोग हो चुका है। तब गन्ने के बड़े खेतों में दिक्कतों के आने पर इसका प्रयोग किया गया था।

ये है बाघ के आतंक का ‌इतिहास

Demand of drone camera to catch the tiger.

सबसे पहले किसी बाघ के भटक कर राजधानी पहुंचने की रिपोर्ट वर्ष 1969 में हुई। जब कुकरैल की तरफ भटक कर आये बाघ को 5 दिन बाद मार गिराया गया।

इसके बाद वर्ष 1979 में कुकरैल के ही जंगलों में नीलगाय को मार चुके बाघ को सातवें दिन ही मार गिराया गया। दस सालों बाद बाघ ने फिर राजधानी का रुख किया। वर्ष 88-89 में इंदिरानगर-कुकरैल आये बाघ को एक बार फिर टीम ने मार गिराया।

ऐसे ही एक ऑपरेशन में वर्ष 2002 में हरदोई के मुल्लापुर गांव में लगभग 8-9 महीने तक बाघ ने वहीं अपना निवास बनाया। उसके बाद बाघ को देखा गया और ग्रामीणों ने उसे मार गिराया। 2008-09 में भटका बाघ तीन-चार महीनों बाद फैजाबाद कुमार गंज में मारा गया।

जबकि 2012 के जाड़ों में रहमानखेड़ा पहुंचा टाइगर बादशाह 113 दिन बाद पकड़ा गया और वापस भेजा गया। विशेषज्ञ संजय नारायन के मुताबिक अब तक कोई भी बाघ दुधवा या पीलीभीत इलाकों से भटककर गंगा तक या गंगा पार तक नहीं पहुंचा, ये ऐसा पहला मामला है।

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