बढ़ रही है रार, मास्टर प्लान कैसे हो तैयार
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शहर के मास्टर प्लान में शामिल 197 गांवों में भवन का मानचित्र पास करने
अपने कार्यक्षेत्र में एलडीए का दखल मानते हुए जिला पंचायत ने इसे तत्काल रोकने की मांग की है। एलडीए के हस्तक्षेप को रोकने की मांग करने वाला पत्र मुख्यमंत्री सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लिखा गया है।
पत्र में शहर के मास्टर प्लान से संबंधित एलडीए बोर्ड बैठक द्वारा पारित बोर्ड प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर यादव व अपर मुख्य अधिकारी अजय कुमार सिंह की तरफ से जारी इस पत्र के बाद दोनों वैधानिक संस्थाओं के बीच कार्य क्षेत्र निर्धारण को लेकर बीते एक साल से छिड़ी जंग अब निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आने लगी है।
लखनऊ विकास
प्राधिकरण का दावा है कि महायोजना के मास्टर प्लान में शामिल शहरी सीमा से
सटीं 197 ग्राम सभाएं उसके कार्यक्षेत्र में शामिल हैं। इन सभी गांवों में
जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत नक्शों को एलडीए ने अवैधानिक करार दिया है।
इस
मुद्दे पर पिछले एक साल से दोनों के बीच रार चल रही है। इस बाबत जिला
पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर का साफ कहना है कि शहर की मास्टर प्लान योजना
का प्रारूप अभी तक अंतिम तौर पर स्वीकृत नहीं है।
ऐसे में जिला पंचायत
कार्यक्षेत्र में आने वाली भूमि पर भवन इत्यादि बनाने के नक्शे की स्वीकृति
वैधानिक तौर पर भी एलडीए नहीं दे सकता। जिन इलाकों के भवन नक्शों को लेकर
एलडीए हल्ला मचा रहा है वहां अभी भी त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था के तहत
चुनाव होता है।
वहीं, एलडीए ने जून में बोर्ड की 150वीं बैठक की कार्यसूची
में 34 नंबर पर रहे प्रस्ताव से शहर के विस्तारित विकास क्षेत्र की
महायोजना लागू होने तक आच्छादित ग्रामीण क्षेत्र में भवन मानचित्र स्वीकृति
हेतु मार्ग दर्शन की कार्यवाही कर आपत्तियां आमंत्रित की है।
निरस्त हो बोर्ड बैठक संबंधी कार्यवाही
जिला
पंचायत अध्यक्ष विजय बहादुर ने प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराते हुए
मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री व सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा
है।
इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत
अधिनियम 1961 की धारा 239 (2) में जो ग्राम पंचायत अस्तित्व में हैं उनके
भवन निर्माण मानचित्र जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत होने का उल्लेख है।
अपर
मुख्य अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन व विकास अधिनियम की
धारा 14(2) के प्राविधान में भी स्पष्ट है कि विकास क्षेत्र में महायोजना
शुरू होने के बाद ही उसमें विकास कार्यवाही को नियंत्रित करने का अधिकार
प्राधिकरण को मिल सकेगा।
ऐसे में एलडीए बोर्ड बैठक में अवैधानिक तौर पर
पारित प्रस्ताव की कार्रवाई को निरस्त किया जाए।