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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संवाद सामान्य, पर निहितार्थ से विश्लेषक चौंके

Tue, 16 Mar 2021 09:52 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 16 Mar 2021 09:52 AM IST
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Defense Minister Rajnath Singh's dialogue normal, but analyst shocked by implication
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
लगभग दो साल के अंतराल के बाद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को यहां हुई भाजपा की नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के उद्घाटन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संवाद सुनने में तो सामान्य और सहज लगा, लेकिन उनके निहितार्थ राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका जरूर गए। 
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उन्होंने भाषण की शुरुआत ही जिस तरह की, उससे लगा कि वह कुछ खास  कहना चाहते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा भी कि वह आज अंतर्मन की बातें करना चाहते हैं। बोले, व्यक्ति पद और कद से नहीं बल्कि कृतित्व से बड़ा होता है। कार्यसमिति की बैठक में खुद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रखने के लिए ही प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का आभार ही नहीं जताया, बल्कि खुद को आमंत्रित करने के लिए भी आभार व्यक्त किया। यह भी बताया कि उन्हें डिस्टेंस बनाकर बात करने की सलाह दी जाती है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकते। उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ तो ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते हैं।
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देर है अंधेर नहीं
रक्षामंत्री ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं का झुंड नहीं है। ये विचारवान कार्यकर्ताओं का संगठन है। अपेक्षाओं को लेकर उनमें बेचैनी हो सकती है। पर, भरोसा रखें, देर हो सकती है अंधेर नहीं हो सकती। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पद के पीछे न भागने की नसीहत भी दी। फिर अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र किया। बोले, उन्होंने कभी पद नहीं मांगा। यही नहीं, उन्होंने वर्ष 1974 में प्रदेश में अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन के कारण भाजपा की लोकप्रियता में वृद्धि तक के प्रसंगों का उल्लेख किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सहारे तन, मन, बुद्धि और आत्मा के सुखों का उल्लेख करते हुए जब उन्होंने धन-धान्य से लेकर मान-सम्मान, ज्ञान और भगवान की महत्ता बताई तो साफ  हो गया कि वे आज की राजनीति की नए संदर्भों की व्याख्या करके कुछ खास बता रहे हैं।
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सपा पर हमले का मकसद
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सहित कुछ अन्य वक्ताओं ने जिस तरह सपा को ही निशाने पर रखा, उससे यह संकेत निकला कि वर्ष 2022 को लेकर भाजपा के रणनीतिकारों की मुख्य नजर सपा पर ही टिकी है। स्वतंत्र देव ने 2022 में साइकिल के 22 पर भी न पहुंचने की बात कहकर और प्रधानमंत्री मोदी की तरफ  से डॉ. आंबेडकर के मान व सम्मान के लिए किए गए कामों का जिक्र कर यह संदेश दे दिया कि चुनावी चौसर पर अनुसूचित जाति के वोटों को सरोकारों के सहारे और बेहतर तरीके से साथ लाने की कोशिश होगी। मगर पार्टी का मुख्य निशाना सपा पर रहेगा।


राजनीति में संयोग का भी योग
वैसे तो यह संयोग हो सकता है, लेकिन राजनीति में संयोगों का भी कुछ न कुछ सियासी योग होता है। 15 मार्च को बसपा के संस्थापक स्व. कांशीराम की जयंती थी। राजधानी के राजनीतिक गलियारों में दिन भर ऐसी चर्चाएं होती रहीं कि कार्यसमिति की बैठक आज के दिन करके भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो बसपा के आयोजन की चर्चा को सीमित करने की कोशिश की है तो दूसरी तरफ  बैठक से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अन्य कुछ नेताओं ने कांशीराम को श्रद्धांजलि देकर और बैठक में डॉ. आंबेडकर से जुड़े स्थान और उनके काम पर भाजपा की सरकारों की योजनाओं का जिक्र करके अनुसूचित जाति को खास संदेश देने का प्रयास किया है।
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