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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Defence Minister Rajnath singh at Akhil Bhartiya Poorva Sainik Seva Parishad's silver jubilee celebrations in Lucknow.

लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- ‘पड़ोसियों’ की मनमानी पर सैन्य प्रमुख लेंगे फैसले, सेना के हर फैसले को सरकार का साथ

Sun, 14 Nov 2021 10:19 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 14 Nov 2021 10:19 PM IST
सार

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। भारत ने दुनिया को संदेश दे दिया है कि अगर किसी ने हमारे देश के खिलाफ साजिश की तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

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Defence Minister Rajnath singh at Akhil Bhartiya Poorva Sainik Seva Parishad's silver jubilee celebrations in Lucknow.
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala

विस्तार

देश के कुछ राजनीतिक दल सेना के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते हैं। ऐसे सवाल तब वाजिब हों जब सैन्य प्रमुखों के हाथ बंधे हों। हम ऐसा नहीं करते।  ‘पड़ोसियों’ की मनमानी पर थल, नभ व वायु सेना के प्रमुख ही फैसला लेंगे। अगर कभी उनका फैसला गलत भी हुआ तो भी हम उनके साथ खड़े रहेंगे।

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को ये बातें राजधानी में उप्र. सैनिक कल्याण निगम में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के रजत जयंती समारोह में कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से पहले हमारे ‘पड़ोसी’ की हरकतों पर सरकारें चुप्पी साध लेती थीं। लेकिन 2014 के बाद उस ‘पड़ोसी’ की मनमानी के खिलाफ जो जवाब दिया गया है, वह काबिले तारीफ है। मौके पर राजनाथ ने 1971 के युद्घ में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले भारतीय जांबाजों को नमन किया और चीन के मनमानी के मंसूबों पर अपने विचार रखे। साथ ही कहा कि दुख इस बात का है कि कुछ राजनीतिक दल बालाकोट व गलवान को लेकर आलोचना करते हैं। 
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अमेरिका-इस्राइल की तरह हम भी देते हैं मुंहतोड़ जवाब
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ  लड़ने की क्षमता पहले अमेरिका व इस्राइल के पास थी। लेकिन अब भारत भी आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देता है। सर्जिकल स्ट्राइक करके इसे साबित भी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंक का साथ छोड़ना ही पड़ेगा। वे रविवार को राजधानी में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के रजत जयंती समारोह में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि भारत की गिनती अब कद्दावर देशों में होती है। दुनिया के तमाम देशों का नजरिया भी बदला है। भारत को कोई छेड़ेगा तोे उसे छोड़ा नहीं जाएगा। कहा, भारत और पाक की तुलना नहीं हो सकती। विजय दिवस और परिषद की रजत जयंती एक साथ होना खुशी की बात है। उन्होंने परिषद की स्मारिका ‘सैन्य चेतना के बढ़ते कदम’ का विमोचन भी किया। परिषद के वीके चतुर्वेदी ने बताया कि 1992 में यहां एक छोटी सी इकाई गठित हुई थी। इसके 25 वर्ष पिछले साल पूरे हुए थे, लेकिन कोरोना की वजह से कार्यक्रम नहीं हो सका। उन्होंने परिषद को मान्यता प्रदान करने के लिए रक्षामंत्री को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में परिषद पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। समारोह में मंत्री ब्रजेश पाठक सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हुए।

सैनिक कभी ‘पूर्व’ नहीं बनता
रक्षामंत्री ने कहा, आपके बीच आकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। पूर्व सैनिकों से आत्मीय संबंध रहा है। कोविड काल में उनकी सेवाएं सराहनीय रही हैं। रक्षामंत्री के रूप में आपसे रिश्ता है, नहीं रहूंगा तो पूर्व रक्षामंत्री के रूप में रहेगा। लेकिन देश का कोई सैनिक कभी पूर्व सैनिक नहीं बनता। 


रक्षा क्षेत्र में 35 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य
राजनाथ ने कहा कि देश में रक्षा आयात पहले 70 फीसदी था। इसे सरकार ने घटाकर 35 फीसदी कर निर्यात को बढ़ाया गया है। 2025 तक डिफेंस निर्यात को बढ़ाकर 35 हजार करोड़ करने का लक्ष्य है। ऑर्डिनेंस फैक्टरी के निगमीकरण के लिए सात कंपनियां बनाई गई हैं, जिन्हें फिलहाल पांच साल तक सरकार संभालेगी। समारोह में उन्होंने सैनिकों व पूर्व सैनिकों के लिए सरकार द्वारा किए पेंशन रेगुलराइजेशन, वन रैंक वन पेंशन जैसे कामों का भी उल्लेख किया।

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