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आशियाना गैंगरेप: गौरव शुक्ला दोषी करार, 16 को सुनाई जाएगी सजा

Thu, 14 Apr 2016 01:45 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 14 Apr 2016 01:45 AM IST
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decision on aashiana Gangrape case by fast track court
लाल घेरे में गौरव शुक्ला - फोटो : Amit singh, Amar Ujala

आशियाना गैंगरेप केस में 11 साल बाद बुधवार को गौरव शुक्ला को दोषी करार दिया गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडीजे अनिल कुमार शुक्ला ने इस मामले में सजा सुनाने के लिए 16 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है।

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पूरी दोपहर इंतजार के बाद शाम साढ़े चार बजे जस्टिस शुक्ला ने कोर्ट में मौजूद गौरव के वकीलो के माध्यम से उसे कोर्ट में हाजिर होने का हुक्म दिया। तीन मिनट में उसे दोषी करार देकर शनिवार को सजा सुनाने का ऐलान किया।
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दोषी करार देने के बाद गौरव को न्यायिक अभिरक्षा में लखनऊ जेल भेज दिया गया। इस मामले में यह पहली बार है जब गौरव सलाखों के पीछे पहुंचा है। इस दौरान मुकदमे में कई मोड़ आए। गौरव ने खुद को नाबालिग साबित करने के लिए कानून के लचीलेपन का भरपूर सहारा लिया। लेकिन, इंसाफ के लिए पीड़ित पक्ष के सब्र को 11 साल बाद मुकाम जवाब मिल ही गया।
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जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड) लखनऊ दो बार और एक बार लखनऊ जिला अदालत उसे बालिग करार दे चुकी थी। तब जाकर उस पर आईपीसी के तहत ट्रायल चल सका।

ये था आश‌ियाना गैंगरेप कांड

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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को अगली सुनवाई यानी 13 अप्रैल को फैसला देने का निर्देश दिया था।

अदालत पहुंचते ही गौरव ने ढंक लिया मुंह
दोषी ठहराए जाने से पहले गौरव शुक्ला के वकील कोर्ट के बाहर मौजूद रहे, लेकिन खुद गौरव वहां मौजूद नहीं था। जब अर्दली ने गौरव का नाम पुकारा तो उसके वकीलों ने उसे फोन लगाकर कोर्ट में बुलाया। जब वह कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने तीन मिनट में ही उसे दोषी ठहरा दिया। अदालत पहुंचे गौरव ने पूरे समय तक अपना मुंह रुमाल से ढंका हुआ था और उसी तरह अदालती दस्तावेजों पर दस्तखत भी किए।

कुल 6 अभियुक्त थे, जानिए 5 का क्या हुआ
दो जुवेनाइल- 2 मई, 2005 के आशियाना दुराचार कांड में छह में से दो अभियुक्त नाबालिग थे। दोनों को जेजे बोर्ड ने तीन वर्ष के लिए बाल सुधार गृह भेजा था। वहां से बाहर आने के बाद एक हादसे में दोनों की मौत हो गई।

तीन अन्य बालिग
दो बालिग दोषियों भारतेंदु मिश्रा और अमन बख्शी को 5 नवंबर, 2007 को एडीजे अनिरुद्ध सिंह ने 10-10 वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी। वहीं, तीसरे बालिग फैजान उर्फ फज्जू को 22 जनवरी, 2013 को एडीजे अखिलेश दुबे ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

... और इंसाफ पाते ही छलक उठा पीड़िता का दर्द

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इंसाफ पाने के बाद आशियाना कांड की पीड़िता का कहना है‘11 सालों से हर दिन, हर पल मैं तिल-तिल कर मरी। 70 से 80 बार कोर्ट में पेश हुई और हर पेशी पर मुझे लगा कि मेरे साथ एक बार और दुष्कर्म की वही घिनौनी वारदात दोहराई गई। आज मैं खुश हूं और बहुत खुश हूं कि आखिरकार अदालत ने गौरव शुक्ला को दोषी तो माना, लेकिन मेरा बचपन, मेरे जीवन के ये 11 साल मुझे कोई नहीं लौटा सकता।’

क्यों अहम है यह केस
11 साल पहले शहर को दहलना वाले आशियाना गैंगरेप केस में सपा के पूर्व एमएलसी अरुण कुमार शुक्ला उर्फ 'अन्ना महाराज' का भतीजा गौरव शुक्ता मुख्य आरोपी है। कहा जाता है कि अन्ना के रसूख के कारण ही पुलिस इस मामले में हीलाहवाली करती रही। हालांकि, बाद में अन्ना ने सार्वजनिक तौर पर घोषित किया कि गौरव से उनका कोई संबंध नहीं है।

अदालत ने बचाव पक्ष की दलील ठुकराई

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गौरव पक्ष का तर्क
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गौरव शुक्ला का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं था। पीड़िता के कलमबंद बयान के बाद 11 मई 2005 को एक गुमनाम पत्र के आधार पर गौरव को आरोपी बनाया गया। घटना में शामिल सेंट्रो कार गौरव की नहीं थी। जो सेंट्रो घटना में शामिल थी,  विवेचक ने यह पता लगाने की कोशिश कभी नहीं की कि वह किसकी कार थी?

कोर्ट ने कहा...
अदालत ने कहा यदि एफआईआर और अन्य विवेचना में अभियुक्त का नाम नहीं मिलता है तो इससे अभियुक्त निर्दोष साबित नहीं होता। साक्ष्य अधिनियम धारा-80 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि विशिष्ट तथ्य का ज्ञान जिस व्यक्ति को होता है, साबित करने का भार उसी पर होता है। चूंकि यह मामला दुराचार का है। इसलिए इसमें पीड़िता का बयान ही पर्याप्त है, क्योंकि पीड़िता भुक्तभोगी है।

भुक्तभोगी से बेहतर गवाह कोई नहीं होता। दूसरे जो गवाह होते हैं, वे केवल ऐसे साक्ष्य होते हैं, जो घटना की पुष्टि या खंडन में सहायक मात्र होते हैं। लिहाजा पीड़िता ने जो बयान दिया है, वह साक्ष्य अधिनियम के तहत पूरी तरह से साबित माने जाने योग्य है। अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप पूर्णतया साबित होते हैं।

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