मौतों का सिलसिला जारी, 35 किसान और मरे
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बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से चौपट हुई खेती से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। भारी कर्ज और उनकी उम्मीदों पर पानी फिरने से सदमे में जी रहे किसानों की मौतों का सिलसिला जारी है।
बीते 24 घंटों में प्रदेश भर में 35 और किसानों की मौतें हो गईं। इनमें ज्यादातर किसानों की सदमे से जान चली गई तो कुछ ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। मरने वालों में मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, बागपत, बाराबंकी, बरेली सुल्तानपुर, झांसी, चित्रकूट, कन्नौज, बांदा और अलीगढ़ आदि जिलों के किसान शामिल हैं।
रविवार को संभल जिले के एक किसान ने खुद को जिंदा फूंक दिया। वहीं संभल के एक और मुरादाबाद के दो किसानों की सदमे से मौत हो गई। आगरा में फसल बर्बाद होने से आहत एक किसान ने आत्मदाह कर लिया जबकि तीन ने सदमे से दम तोड़ दिया।
एटा के विकास खंड शीतलपुर के गांव शाहपुर में शनिवार रात किसान विजय सिंह की फसल बर्बाद देख सदमा लगने से मौत हो गई। कासगंज के गांव मझौला में गेहूं की फसल की बर्बादी एवं बाग में हुई जबरदस्त क्षति ने एक ओर किसान की जान ले ली।
किसी को लगा सदमा तो किसी ने लगाई फांसी
मथुरा के गांव फालैन और फीरोजाबाद में थाना पचोखरा क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर में बारिश से फसल बर्बाद होने के सदमे से दो किसानों मौत हो गई। बागपत के गांव खामपुर निवासी किसान सतेंद्र, बाराबंकी के गांव मीतपुर मजरे निजामुद्दीनपुर निवासी गरीबे और सुल्तानपुर के सकरदे गांव में महिला किसान की गेहूं फसल बर्बाद होने के सदमे में जान चली गई।
बदायूं जिले में एक युवा किसान ने फांसी लगा ली, वहीं बरेली जिले में सदमे से चार और पीलीभीत में एक किसान की मौत हो गई। अलीगढ़ जिले में प्राकृतिक आपदा किसानों की जिंदगी पर कहर बन कर टूट रही है।
बर्बाद हुई फसल से दुखी गोंडा में एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी जबकि खैर में दो किसानों की सदमे से मौत हो गई।
वहीं अतरौली में एक महिला महिला की भी सदमे से मौत हो गई। हमीरपुर में एक और जालौन में दो किसानों ने फांसी लगाकर जान दे दी, जबकि झांसी, बांदा, चित्रकूट और कन्नौज में एक एक किसान की सदमे से मौत हो गई।