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पड़ताल: राजधानी में होटलों में ठहर रही मौत, आग के मुहाने पर हैं चारबाग की रेवड़ी मंडी में चल रहे होटल
Mon, 11 May 2026 09:59 AM IST
Bhupendra Singh
शुभम अवस्थी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
शुभम अवस्थी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 11 May 2026 09:59 AM IST
सार
राजधानी में होटलों में मौत ठहर रही है। यहां चारबाग की रेवड़ी मंडी में चल रहे होटल आग के मुहाने पर हैं। होटल में इतने संकरे गलियारे है कि आग लगी तो ठहरने वाले लोग भाग नहीं पाएंगे। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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होटलों में आने-जाने के पतले रास्ते, बिना बोर्ड चल रहा होटल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
राजधानी लखनऊ में चारबाग की रेवड़ी मंडी में करीब दो दर्जन से अधिक ऐसे होटल हैं, जहां अगर एक बार आग लगे तो न जाने कितने लोगों की जान चली जाए। कारण, इन होटलों में प्रवेश का सिर्फ एक ही रास्ते का होना, वेंटिलेशन की व्यवस्था और स्मोक डिटेक्टर का न होना है। रविवार को इन्हीं खामियों के साथ चल रहे पांच होटलों की पड़ताल की गई।
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रेवड़ी मंडी में घुसते ही बाएं हाथ पर दो मंजिला शरनजीत होटल है। पहली नजर में तो पता ही नहीं चलता कि यह होटल है। मुश्किल से 300 वर्ग फीट में बने इस होटल के बाहर मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है। ठीक इसी के बगल से होटल तक पहुंचने का दो फीट चौड़ा रास्ता है। कमरे इतने छोटे हैं कि इसमें सिर्फ बेड पड़ने की ही जगह बचती है। इतना ही नहीं, होटल के बगल में तारों का मकड़जाल है, जो आग लगने पर घी का काम कर सकता है।
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बिना बोर्ड के हो रहा संचालन
होटल शरनजीत से थोड़ा आगे एक ऐसा होटल भी मिला, जो जर्जर हो चुका है। तीन मंजिला इस होटल की दीवार पर बोर्ड की जगह देसी शराब की दुकान लिखा है, जिसे सफेदी से काफी हद तक छिपा दिया गया। तीन फीट चौड़ा एक शटर लगा हुआ है, जहां कर्मचारी बैठा था। होटल के अंदर पहुंचने पर सिर्फ दो फीट चौड़ा गलियारा दिखा। यहां आग से ज्यादा तो इमारत के ढहने का डर बना हुआ है।न वेंटिलेशन, न स्मोक डिजास्टर
होटल मनप्रीत का भी कुछ ऐसा ही हाल दिखा। यहां पतली और खड़ी सीढि़यां थीं, जिनमें रेलिंग नहीं थी। यह होटल भी दोमंजिला है। होटल में कुछ जगहों पर बाल्टी तो बालू भरी टंगी मिलीं। मगर न स्मोक डिटेक्टर लगे थे और न ही कोई वेंटिलेशन की व्यवस्था थी। ऐसे में अगर किसी कमरे में आग लगी तो आग से कम और धुआं भरने पर ज्यादा जनहानि होगी। यही स्थिति होटल शक्ति की भी है।नहीं पहुंच सकेगी दमकल की गाड़ियां
इन सभी होटलों तक पहुंचने का रास्ता इतना संकरा है कि आग लगने पर दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच सकेंगी। होटलों के आसपास कोई फायर हाइड्रेंट भी नहीं लगा है।100 होटलों को नोटिस, सात का बिजली काटी
ग्राहकों के साथ खेल रहे ऐसे सौ होटल के संचालकों को इस वर्ष दमकल ने नोटिस जारी किया है, जबकि गोमतीनगर के सात होटलों के बिजली कनेक्शन भी काटे जा चुके हैं। 60 और होटलों के लाइसेंस निरस्तीकरण के लिए प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है।ये होती है कार्रवाई
अगर किसी होटल में अग्निशमन विभाग के अनुरूप तय मानक पूरे नहीं होते तो संचालकों को नोटिस जारी होता है। 15 दिन का समय मानकों और व्यवस्थाओं को पूरा करने के लिए दिया जाता है। अगर इस पर व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुईं तो दमकल विभाग दोबारा नोटिस जारी करता है। इसका भी जवाब नहीं देने पर लाइसेंस निरस्त करने के लिए प्रशासन से संस्तुति की जाती है।ये हैं मानक
- जरूरत के हिसाब से अग्निशमन उपकरण हों।
- साफ-सुथरा आपातकालीन निकास द्वार हो।
- नौ मीटर से ऊंचे होटलों के लिए विशेष एनओसी जारी होता है।
- निकास के संकेतक बोर्ड लगे हों।
- बड़े होटलों में अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम हो।
- होटल के बाहर छह मीटर चौड़ी सड़क हो।
- हर छह माह में बिजली विभाग से ऑडिट कराना जरूरी।