'दस लक्षण' त्योहार पर मंदिरों में रही रौनक
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जैन धर्म में पर्वों का राजा कहे जाने वाले ‘दस लक्षण’ त्यौहार के मौके पर
पूरे दस दिन चलने वाले ‘दस लक्षण’ पर्व का मंगलवार को तीसरा दिन था। इस अवसर पर शहर के सभी 11 मंदिरों में काफी चमक-दमक और रौनक देखने को मिली।
गोमतीनगर
के विशाल खंड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को जैन धर्म के
अनुयायिओं ने एकत्र होकर पूजा अर्चना की और ‘दस लक्षण’ के तीसरे उपदेश के
अनुसार स्वयं को सरल बनाने की प्रार्थना की।
साल में तीन बार पड़ने वाले दस
लक्षण पर्व में भादों के महीने में होने वाले पर्व का सबसे अधिक महत्व है।
10 दिनों के दौरान हर दिन किसी एक अवगुण पर विजय प्राप्त करने के लिए व्रत
रखा जाता है।
श्री 1008 चंद्रप्रभू दिगंबर जैन मंदिर सेवा संस्थान के
अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन के अनुसार आत्मा को संसार परिभ्रमण से मुक्त कराने
और मायाचार का परिहार करने के लिए आर्जव धर्म धारण करना चाहिए।
सेवा
संस्थान के महामंत्री राजेंद्र कुमार जैन के अनुसार आधे अषाढ़ से भादों में
पड़ने वाली अनंत चतुर्दशी यानी पूरे 49 दिन परिवर्तन का समय माना जाता है।
इस परिवर्तन का बुरा असर न पड़े इसलिए अंतिम 10 दिनों में व्रत रखा जाता
है।