दक्षणा फाउंडेशन: एक और 'सुपर-30'
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इनमें से किसी के पिता फल-सब्जी बेचते थे तो कोई मजदूरी करता था। पर इनका ख्वाब आसमान सा ऊंचा और जज्बा पहाड़ सरीखा। ये यूपी समेत गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के जवाहर नवोदय स्कूल, बूंदी के छात्र थे। इंजीनियर बनना चाहते थे, वो भी आईआईटी से।
आर्थिक रूप से कमजोर इन छात्रों की मदद के लिए आगे आया पुणे का चैरिटेबल ट्रस्ट दक्षणा फाउंडेशन। दक्षणा ने रेजोनेंस ट्रस्ट की मदद से स्कूली पढ़ाई के साथ 52 छात्रों को दो साल तक जेईई-मेन और एडवांस परीक्षा की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग दिलवाई।
रिजल्ट आया तो 51 बच्चे मेन में सफल रहे और एडवांस में अच्छी रैंक मिलने पर 47 बच्चों ने आईआईटी में एडमिशन लिया।
नवोदय स्कूलों के छह रीजन के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग दिलाने का प्रयास दक्षणा फाउंडेशन ने 2007 से शुरू किया।
पहले पांच बैचों में 15 से 20 फीसदी बच्चे ही सफल रहे। 2013 में सिर्फ 17 बच्चे ही चयनित हुए लेकिन इस बार 98 फीसदी बच्चे आईआईटी में एडमिशन लेने में सफल रहे।
किसी के पिता मजदूर तो कोई फल बेचने वाला
•सारंगपुर, यूपी के चांदसीकरी गांव के राजेंद्र के पिता मजदूरी करते हैं। राजेंद्र को सामान्य वर्ग में ऑल इंडिया 500 रैंक मिली। उसे आईआईटी रूड़की में सिविल में एडमिशन लिया है।
•यूपी के संभल जिले के लखौडी वारसल में शिक्षक राजपाल सिंह के बेटे अक्षय कुमार (रैंक 1695) ने आईआईटी, पटना में एडमिशन मिल गया।
•विकास सुतारकर मप्र के टीकमगढ़ के बस्तीपुर के रहने वाले हैं। पिता कांशीराम फल बेचते हैं। विकास को एससी कैटेगरी में 5वीं रैंक मिली और आईआईटी मुंबई में मैकेनिकल में एडमिशन लिया।
•गुजरात के वीमदनी गांव में आंगनवाड़ी शिक्षिका रमिला के बेटे जीत कुमार को एससी में 42वीं रैंक मिली। उसे भी मुंबई में इलेक्ट्रिकल ब्रांच मिली है।
•टोरंगाबाद में खेती करने वाले श्रीरंग बिट्ठल के बेटे अविनाश डोंगरे को एससी वर्ग में 142वीं रैंक मिली और उसने आईआईटी मुंबई में सिविल ब्रांच में एडमिशन मिला है।
•वर्धा के पवनार में एक कंपनी में फिटर देवमन किशनजी के बेटे अक्षय डी मालखेडे को एससी वर्ग में 271वीं रैंक मिली और उसने आईआईटी रूड़की में इलेक्ट्रिकल ब्रांच में प्रवेश लिया है।
कौन है दक्षणा का संस्थापक
दक्षणा फाउंडेशन के संस्थापक मोहनीश पैबराय अमेरिका में बसे भारतीय हैं। यहां कार्यकारी अधिकारी शर्मिला पाई ने बताया कि 2007 में इस अभियान की शुरूआत की थी।
इस साल सर्वाधिक 64.4 प्रतिशत बच्चे आईआईटी में पहुंचे हैं। 2016 की तैयारी के लिए सभी राज्यो के जेएनवी से फिर गरीब बच्चों के बैच बनाए जाएंगे जिन्हें रेजोनेंस और टाइम संस्थानों की फैकल्टी नि:शुल्क पढाएगी।
स्क्रीनिंग टेस्ट से चुनते हैं मेधावियों को
नि:शुल्क कोचिंग के लिए देशभर में चल रहे 600 जवाहर नवोदय स्कूलों के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाता है। इसमें सफल छात्रों को कोचिंग दी जाती है।
क्या कहते हैं जानकार
जेईई-मेन और एडवांस जैसी कठिन परीक्षाओं में चुने गए छात्रों ने कड़ी मेहनत की। गरीब माता-पिता के इन बच्चों ने परिवार को भुलाकर दो साल तक जी-जान से पढ़ाई करते हुए यह सफलता हासिल की।
- आरएल माली, प्रिंसिपल, जवाहर नवोदय विद्यालय, बूंदी
गरीब बच्चों को जेईई की नि:शुल्क कोचिंग देने के लिए रेजोनेंस ने दो रीजन में नि:शुल्क सेवाएं देने की जिम्मेदारी ली। हमें खुशी है कि गरीब परिवारों को भी आईआईटी तक पहुंचने का अवसर मिल सका।
- आरके वर्मा, सीएमडी रेजोनेंस, कोटा