चेकों का क्लोन बनाकर खेल कर देते थे ये 'नटवर लाल'
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इस्तेमाल चेकों का क्लोन बनाकर बैंक खातों से रुपये हड़पने वाले गिरोह के दो सदस्यों को एसटीएफ ने लखनऊ के गोमतीनगर इलाके से गिरफ्तार किया है।
इनके पास से विभिन्न बैंकों की पास बुक व चेक बुक के अलावा 63 इस्तेमाल चेक व सात क्लोन चेक भी बरामद हुए।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार विभिन्न स्रोतों से सूचना मिल रही थी कि लखनऊ व आसपास के जिलों में विभिन्न बैंकों के चेकों का क्लोन बनाकर बैंकों से धन निकालने वाला गिरोह सक्रिय है।
इससे जहां खाताधारकों को परेशानी हो रही थी वहीं बैंकों की साख को भी बट्टा लग रहा था।
इस तरह शिकंजे में आए
एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने डिप्टी एसपी मनीष चंद सोनकर को इस गिरोह के बारे में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए थे।
सोनकर की टीम के निरीक्षक एनआर दोहरे को मंगलवार को मुखबिर से यह जानकारी मिली थी कि इस गिरोह के कुछ सदस्य गोमतीनगर के मिठाई वाला चौराहा पर आएंगे जिनके पास क्लोन चेक व उससे सम्बन्धित अन्य सामग्री है।
इस सूचना पर एसटीएफ की टीम ने निश्चित स्थान पर पहुंचकर घेराबन्दी की जहां दो लोगों को पकड़ लिया गया।
पकड़े गए इलाहाबाद निवासी मोहम्मद शमशाद उर्फ शानू तथा मुइनुद्दीन सिद्दीकी उर्फ पप्पू उर्फ साहिल की तलाशी लेने पर उनके पास से चेक बुक, पास बुक, इस्तेमाल चेक, बैंक खातों के विवरण व सात क्लोन चेक समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए।
ऐसे करते थे जालसाजी
इन दोनों ने पूछताछ में बताया कि वे बैंक कर्मियों से साठगांठ करके प्रयोग हो चुके चेक प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद उन चेकों पर लिखे खाता धारक के खाते का गोपनीय विवरण-अकाउंट नंबर, माइकर कोड, बैंक शाखा व खाताधारक के हस्ताक्षर का नमूना आदि प्राप्त कर लिया जाता है।
फिर उसी खाताधारक के अकाउंट का स्टेटमेंट हासिल करने के लिए इनके द्वारा बैंक में खाताधारक के नाम से फर्जी हस्ताक्षर से आवेदन कर खाते की डिटेल प्राप्त कर ली जाती है। इसके बाद बैंक की उसी शाखा में जिसमें खाताधारक का अकाउंट है, फर्जी आईडी से नया अकाउंट खुलवाया जाता है। फिर बैंक अकाउंट से संबंधित सामग्री पास बुक, चेक बुक व एटीएम कार्ड आदि प्राप्त कर लिए जाते हैं।
बैंक से मिली चेक बुक में खाताधारक का नाम, अकाउंट नंबर व माइकर कोड केमिकल लगाकर मिटा दिया जाता है। इसके बाद प्रिंटर की सहायता से उस पर प्रयोग किए चेकों के खाताधारक के नाम, अकाउंट नंबर व माइकर कोड अंकित कर क्लोन चेक तैयार कर लिए जाते हैं।
इस पर खाताधारक के फर्जी हस्ताक्षर करके किसी भी बैंक में जमा कर धनराशि किसी अन्य खाता में हस्तांतरित करा दी जाती है। उसके बाद रुपये निकालकर आपस में बांट लिए जाते हैं।
दो सालों से कर रहे थे खेल
जालसाजों ने बताया कि वे लोग पिछले लगभग दो वर्षों से यह धंधा कर रहे थे और इस कार्य में इनको लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के विभिन्न जनपदों में रहने वाले कुछ लोग सहयोग करते हैं। बैंक कर्मियों व अन्य सहयोग करने वालों के संबंध में छानबीन की जा रही है।
ये सामान हुए बरामद
- चार पास बुक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (इनमें दो फर्जी आईडी से हासिल)।
- एसबीआई की एक पास बुक जिस पर खाता संख्या व नाम अंकित नहीं है।
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तीन चेक बुक (फर्जी आईडी से प्राप्त)।
- इंडियन ओवरसीज बैंक की दो चेक बुक (इनमें एक चेक बुक फर्जी आईडी से प्राप्त)।
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पांच क्लोन चेक।
- विभिन्न बैंकों के प्रयोगशुदा 63 चेक
- क्लोनिंग के लिए तैयार किए जा रहे दो सादे चेक
- एक फर्जी मतदाता पहचान-पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस व राशन कार्ड
- एक एटीएम कार्ड
- बैंक से संबंधित अन्य अभिलेख
- 1200 रुपये नगद
- तीन मोबाइल फोन