Crime: 300 किलो चांदी लेकर भागा कारोबारी गिरफ्तार, एक करोड़ की चांदी और सोना बरामद
पुलिस ने आरोपी अमित अग्रवाल की निशानदेही पर 10 पैकेट चांदी की सिल्लियां बरामद कीं, जिनका वजन 116 किलो हैं। इनकी कीमत करीब 75 लाख रुपये है। वहीं उसके पास से करीब 25 लाख रुपये कीमत का 425 ग्राम सोना और एक लाख रुपये नकद बरामद किया गया है। दो कार भी बरामद हुई हैं।
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लखनऊ में चौक के सराफा बाजार के पांच करोबारियों की 300 किलो चांदी हड़पने वाले जालसाज अमित अग्रवाल को चौक पुलिस ने 116 किलो चांदी और 425 ग्राम सोने के साथ गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक, आरोपी अमित अग्रवाल चौक के बाबा महानारायण का रहने वाला है। अमित ने चौक सराफा बाजार के पांच कारोबारियों से कच्ची चांदी रिफाइन करने के लिए ली थी। इसके बाद सारा सामान समेटकर फरार हो गया था। वहीं व्यवसायी आलोक गुप्ता से सोना भी मरम्मत व जेवर बनाने के नाम पर लिया था। पुलिस ने आरोपी अमित अग्रवाल की निशानदेही पर 10 पैकेट चांदी की सिल्लियां बरामद कीं, जिनका वजन 116 किलो हैं। इनकी कीमत करीब 75 लाख रुपये है। वहीं उसके पास से करीब 25 लाख रुपये कीमत का 425 ग्राम सोना और एक लाख रुपये नकद बरामद किया गया है। दो कार भी बरामद हुई हैं। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, चौक इलाके के अन्य कारोबारियों से भी ठगी की सूचना आ रही है। उनसे भी ब्योरा जुटाया जा रहा है।
गुरुग्राम में फर्जी पहचानपत्र से खरीदे थे चार सिम
डीसीपी पश्चिम डॉ. एस चिनप्पा के मुताबिक, पुलिस टीम ने अमित के नौकर और चालक से पूछताछ की थी तो पता चला था कि अमित अपने परिवार, घरेलू नौकर वैभव सिंह और चालक अयाज के साथ खजुराहो गया है। वहां से झांसी आकर दिल्ली गुरुग्राम चला गया। वहां नौकर के आधार कार्ड पर चार सिम जारी कराए और उन्हीं से अपने लोगों के संपर्क में था। एसीपी चौक आईपी सिंह के मुताबिक, अमित अग्रवाल गुरुग्राम जाने से पहले अमित ने अपनी दोनों कारें झांसी रेलवे स्टेशन पर खड़ी कर दी थीं। वहां से ट्रैवेल एजेंसी से दो कारें बुक कीं, उन्हीं से गुरुग्राम पहुंचा। वहां होटल में कमरा लिया। इसके बाद वह कार से झांसी वापस आया। वहां से मध्य प्रदेश के दतिया गया। वहां अपने एक परिचित को बुलाया और उसे सोने-चांदी के कई पैकेट देकर वापस गुरुग्राम चला गया।
कारोबार में लगा घाटा तो बाजार से चांदी उठा भाग गया
एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक, अमित ने बताया कि चांदी के रिफाइनरी के काम में कमीशन तय होता था। कारोबार में घाटा होने लगा जिसे जितनी चांदी वापस करनी थी, नहीं कर पा रहा था। इसी कारण सोचा कि बाजार से अधिक से अधिक चांदी उठा लूं। इसके बाद कई कारोबारियों से रिफाइन करने के लिए चांदी व जेवरात लिए लेकिन वापस नहीं किए।