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LDA के करोड़पति चपरासी के खिलाफ शुरू हुई जांच

Sat, 11 Jan 2014 10:36 AM IST
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 11 Jan 2014 10:36 AM IST
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inquiry against fraud peon

चपरासी ने एलडीए में मकान दिलाने के नाम पर अनेक लोगों से रुपये वसूले, इस मामले में प्राधिकरण के सचिव के आदेश पर जांच का आगाज शुक्रवार को कर दिया गया।

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आश्रयहीन योजना में मकान दिलाने के नाम पर किए गए इस फ्रॉड में जांच विशेष कार्याधिकारी राजीव कुमार को सौंपी गई है।

सचिव अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने उनको सोमवार को रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। इस मामले में आरोपी चपरासी को सस्पेंड करने की कार्रवाई सोमवार को शुरू होगी। दूसरी ओर, कुछ पीड़ितों ने शुक्रवार को उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल से शिकायत की।
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उन्होंने उपाध्यक्ष को शिकायत के साथ वही सीडी भी दी, जिसमें आरोपी चपरासी ने धन लेने की बात स्वीकार करने के साथ ही पीड़ित को धमकी भी दी है।

हरदोई रोड की आश्रयहीन योजना में मकान आवंटित कराने के नाम पर शिवकुमार ने कई लोगों से 80 हजार से लेकर 1.20 लाख रुपये वसूले हैं।

इन लोगों को फर्जी अलाटमेंट लेटर भी दिए गए। धोखाधड़ी के एक ऐसे ही केस में शिवकुमार वर्ष 2008 में जेल की हवा भी खा चुका है। इसके बावजूद प्राधिकरण ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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एक पीड़ित के पुत्र राहुल गौतम ने शिवकुमार का स्टिंग ऑपरेशन कर के उनको कैमरे पर रुपया लेने और कभी न वापस करने की बात करते हुए कैद कर लिया था।

पीड़ितों ने लगाई वीसी के समक्ष गुहार
कई पीड़ितों ने शुक्रवार को वीसी एमपी अग्रवाल के दफ्तर जाकर अपनी शिकायत दी।

वीसी के न होने के चलते इन्होंने अपनी शिकायत उनके पीए को रिसीव करा दी। जिसमें शिकायत पत्र के साथ सिटंग की सीडी भी दी गई है।

पीड़ितों ने उपाध्यक्ष से अपील की है कि, इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर के पीड़ितों को न्याय दिलवाया जाए।

एलडीए में 2010 के बाद से बिना लाटरी और नीलामी के आवंटन नहीं किया जाता है। इससे पहले उपाध्यक्ष और सचिव स्तर पर सीधा आवंटन भी होता था।

मगर विपुलखंड के प्लॉट आवंटन घोटाले के बाद शासन ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी। अब एलडीए की रिक्त हो या नई किसी भी तरह की संपत्ति का आवंटन लाटरी या फिर नीलामी के माध्यम से ही किया जाता है।


प्राधिकरण के सचिव अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने बताया कि अगर कोई भी आपको प्राधिकरण के नाम से प्लॉट या फ्लैट दिलाने की बात करे और धन मांगे, तो उसके झांसे में न फंसें।

प्राधिकरण की प्रत्येक योजना का गजट पहले समाचार पत्रों में होता है। इसके बाद में पंजीकरण फिर लाटरी या नीलामी होती है। इसके बाद में ही आवंटन किया जाता है।

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