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आठ सौ करोड़ का घोटाला, FIR तक दर्ज नहीं
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 09 Apr 2014 09:11 AM IST
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उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) में 806 करोड़ रुपये का फर्जी ठेका देने के मामले में पांच दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
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अब अगर पुलिस इस मामले में जुड़े लोगों की कॉल डिटेल खंगाले तो फर्जीवाड़े से पर्दा उठ सकता है लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के नुमाइंदे पुलिस के पास नहीं पहुंचे हैं।
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जबकि यूपीटीयू के घोटालेबाजों ने उनसे 23.52 करोड़ रुपये का फर्जी चेक जारी करके करीब ढ़ाई करोड़ रुपये डकार भी लिए हैं।
फिलहाल, इस मामले में जानकीपुरम थाने के विवेचना अधिकारी संजीव कांत मंगलवार को भी इस मामले की जांच शुरू नहीं कर पाए। राम नवमी पर्व के अवसर पर अवकाश के कारण अधिकारियों से वे नहीं मिल पाए।
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इस मामले में यूपीटीयू प्रशासन का रवैया सख्त है, तभी कुलपति डॉ. आरके खांडल ने मामला सामने आते ही एडीजी विजलेंस को पत्र लिखा और तत्काल मामले की एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश रजिस्ट्रार यूएस तोमर को दे दिए।
सूत्रों की मानें तो बुधवार को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक में भी यह मुद्दा उठ सकता है। यूपीटीयू प्रशासन खुद चाहता है कि इस मामले में उनके यहां के जो अधिकारी व कर्मचारी संलिप्त हों।
उन पर सख्त कार्रवाई की जाए लेकिन पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड व प्रकाश कंस्ट्रोवेल लिमिटेड की ओर से अभी तक कोई नुमाइंदा पुलिस के पास अपने दस्तावेज और फर्जीवाड़े की शिकायत लेकर नहीं पहुंचा है।
दरअसल, इस मामले में बिचौलिए अभी भी सब कुछ मैनेज करने की कोशिश में जुटे हैं। इसके पीछे कारण है कि जिस तरह कंपनी ने बैक डोर से एंट्री करने की कोशिश की, उससे उस पर भी अंगुलियां उठेंगी।
अगर इतना बड़ा ठेका कंपनी ले रही थी तो यूपीटीयू के शीर्षस्थ अधिकारियों से आज तक कंपनी के उच्च पदों पर बैठे अधिकारी क्यों नहीं मिले? सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में कंपनी की ओर से लगाए गए बिचौलिए भी चूना लगाने में पीछे नहीं हैं।
जिन दो लोगों के नाम इसमें आ रहे हैं अब उनका पता नहीं है, वे सामने नहीं आ रहे। पारिख कंस्ट्रक्शन कंपनी ने राजधानी में जहां पर अपना ऑफिस खुला दिखाया है, चिनहट में उस स्थान पर कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति का मकान है।
फिलहाल, इतने बड़े मामले में अभी तक पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। ऐसे में अगर कॉल डिटेल को खंगाला गया तो कई बड़ों की गर्दन फंस सकती है।