सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फंसाया और फिर ठग लिए 17 लाख रुपये
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लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार निवासी सियाराम शर्मा और उसके बेटे सुभाष ने पशुपालन विभाग में नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये ठग लिए। ठगी के शिकार लोगों ने सियाराम शर्मा से रुपया वापस मांगा तो वह जान-माल की धमकियां देने लगा। पीड़ितों ने एडीजी क्राइम से शिकायत की, जिसके बाद दोनों के खिलाफ जानकीपुरम थाना में केस दर्ज किया गया।
इंस्पेक्टर ने बताया कि सिद्धार्थनगर के चौखड़ा गांव निवासी अंगद कुमार गौड़ ने सितंबर 2016 में सियाराम शर्मा से संपर्क किया था। उस वक्त सियाराम ने खुद को पशुपालन विभाग में क्लर्क बताते हुए रिक्तियां निकलने की बात कही। उसने कहा था कि कुछ रुपये खर्च करने पर वह क्लर्क व अन्य पदों पर नौकरी दिला सकता है।
अंगद ने उससे खुद की नौकरी के लिए कहा तो सियाराम ने तीन लाख रुपये मांगे। बकौल अंगद, ठग ने अन्य लोगों को भी नौकरी के लिए लाने को कहा जिस पर उन्होंने अपने भांजे नवनीत कुमार, छोटे बहनोई मनमोहन सहित गांव के सुरेंद्र सिंह व उसके भाई देवेंद्र सिंह, सिद्धार्थ यादव और विवेक कुमार से संपर्क कर उन्हें भी राजी कर लिया।
सभी सात लोगों की नौकरी के लिए 21 लाख रुपये में बात तय हुई, जिसमें से अलग-अलग वक्त पर 17 लाख रुपये सियाराम को दे दिए गए। नौकरी न मिलने पर अंगद ने पशुपालन विभाग जाकर डॉ. बीबी जोशी और डॉ. केपी सिंह से मुलाकात कर नियुक्ति पत्र दिखाया तो उन्होंने नियुक्ति पत्र फर्जी बताते हुए कहा कि विभाग में कोई रिक्तियां ही नहीं निकली हैं।
बस्ती निवासी रिश्तेदार के जरिये हुई थी मुलाकात
अंगद ने बताया कि सियाराम से उसकी मुलाकात बस्ती निवासी रिश्तेदार प्रेमचंद्र के जरिये हुई थी। प्रेमचंद्र ने सियाराम से नौकरी के लिए कई लोगों को मिलवाया था। अंगद का कहना है कि सियाराम ने सबसे रुपये लिए लेकिन किसी की नौकरी नहीं लगवाई।
प्रेमचंद्र इस बात को जानता था कि सियाराम ठगी कर रहा है। हो सकता है कि ठगी के इस धंधे में प्रेमचंद्र भी शामिल हो। इंस्पेक्टर ने कहा कि ठग पिता-पुत्र और प्रेमचंद्र की तलाश की जा रही है।
अफसरों के कमरे में जाकर छूता था पैर
अंगद ने बताया कि शातिर सियाराम अधिकारियों से अपनी नजदीकियां बताने के लिए लोगों को पशुपालन विभाग ले जाता था। वह उसे व रिश्तेदारों को वहां ले गया। अधिकारी डॉ. बीबी जोशी और डॉ. केपी सिंह का नाम लेते हुए बोला कि उन्हें ही नौकरी फाइनल करनी है।
अधिकारियों के कक्ष के बाहर सबको रोककर वह खुद भीतर चला जाता था। अधिकारियों के पैर छूता और बाहर आ जाता। बाहर आकर वह कहता कि अधिकारियों ने नौकरी के लिए हां कर दी है।