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CMO हत्याकांड: सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट हुई खारिज
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 10 Sep 2013 08:53 AM IST
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परिवार कल्याण के तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनोद कुमार आर्य तथा डॉ. बीपी सिंह हत्याकांड में राजधानी के पूर्व सीएमओ डॉ. एके शुक्ला को क्लीन चिट देने वाली क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दी है।
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विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलकान्त मणि ने साथ ही यह निर्देश भी दिया कि सीबीआई के पुलिस अधीक्षक मामले की अग्रिम विवेचना कराएं।
गौरतलब है कि सीबीआई ने हत्याकांड में डॉ. शुक्ला को क्लीन चिट देते हुए इसी साल 20 मई को क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि डॉ. शुक्ला के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जो हत्याकांड में उनकी संलिप्तता साबित करती हो।
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कोर्ट ने सोमवार को क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा कि दोनों ही सीएमओ की हत्या के पीछे न केवल उद्देश्य स्पष्ट है बल्कि षड्यंत्र भी साफ है।
कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट पर अंगुली उठाते हुए कहा कि सीबीआई ने स्वयं ही माना कि दोनों हत्याओं में डॉ. शुक्ला का निहित स्वार्थ था लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे उन्हें आरोपी बनाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि दोनों सीएमओ की हत्या कराने के लिए डॉ. शुक्ला के पास पुख्ता कारण थे।
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कोर्ट ने कहा कि डॉ. शुक्ला के खिलाफ साक्ष्य है तथा यह अपराध राज्य के खिलाफ है। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने के दौरान इसी मामले में जेल में बंद रहे पूर्व डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान द्वारा डॉ. शुक्ला को अपनी मदद के लिए लिखे एक पत्र का भी जिक्र किया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि साक्ष्य में आया है कि डॉ. सचान और डॉ. शुक्ला में काफी घनिष्ठता थी। डॉ. सचान वर्ष 2007 से डॉ. शुक्ला के अधीन डिप्टी सीएमओ के पद पर तैनात रहे तथा डॉ. शुक्ला के भ्रष्ट क्रिया कलापों में सहयोगी रहे।
कोर्ट ने कहा कि साक्ष्य में यह भी आया है कि एसटीएफ ने डॉ. शुक्ला तथा डॉ. सचान की उस बातचीत को रिकार्ड किया है जिसमें यह स्पष्ट है कि डॉ. शुक्ला, डॉ. सचान के जरिये कमीशन खाते थे।
कोर्ट ने कहा कि डॉ. शुक्ला ने सीएमओ के पद को एक करने के लिए सितंबर 2010 में परिवार कल्याण मंत्री से मिलने का प्रयास किया था। वे डॉ. सिंह की कार्यप्रणाली से भी नाराज थे क्योंकि वे परिवार कल्याण के पद को समाप्त नहीं होने दे रहे थे।
कोर्ट ने कहा कि यह सही है कि डॉ. शुक्ला ने मनोविज्ञानियों के समक्ष कहा कि दोनों हत्याकाण्ड में उनकी संलिप्तता नहीं है लेकिन मनोविज्ञानी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं थे तथा जवाब को भ्रमित करने वाला बताया है।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने दोनों ही मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने इस पर डॉ. बीपी सिंह हत्याकांड के वादी आईपी सिंह तथा डॉ. विनोद आर्या हत्याकांड की वादिनी शशि कुमारी को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने का आदेश दिया था।
इस पर आईपी सिंह ने सीबीआई की विवेचना से संतुष्टि जताते हुए मामले में अपनी अनापत्ति दाखिल कर दी थी जबकि डॉ. आर्या की पत्नी व वादिनी शशि कुमारी न तो कोर्ट में उपस्थित हुई न ही कोई जवाब ही दाखिल किया।