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रिश्वत लेकर बाबू कम करा रहा था बिजली का बिल, गिरफ्तार
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 13 Dec 2013 11:22 AM IST
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बिजली का बिल कम करने के लिए गेस्ट हाउस मालिक से 30,000 रुपये रिश्वत मांग रहे लेसा के यूपीआईएल उपखंड के क्लर्क राम प्रकाश यादव को बृहस्पतिवार दोपहर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने दबोच लिया।
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गेस्ट हाउस मालिक के मुताबिक वह बिल ठीक कराने के लिए 10 दिसंबर को रकम लेकर गए थे लेकिन क्लर्क ने ज्यादा रुपयों की मांग कर दी। रकम देने से मना करने पर क्लर्क नब्बे हजार रुपये का बिल बनाने की धमकी देने लगा।
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आखिर में गेस्ट हाउस मालिक ने एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी से शिकायत की। उन्होंने इंस्पेक्टर को छानबीन कर आरोपी की ट्रैपिंग के निर्देश दिए। जिसके बाद जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
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पुराना आरटीओ के बगल में अर्जुन चौधरी का चौधरी गेस्ट हाउस है। यह गेस्ट हाउस उन्होंने दो साल पहले बनवाया था। यहां कॉमर्शियल कनेक्शन लेने के लिए वे कई महीनों से यूपीआईएल उपखंड के चक्कर काट रहे थे।
अर्जुन के मुताबिक जब उनकी सुनवाई नहीं हुई तो छह महीने पहले उन्होंने कोर्ट से आदेश लेकर कनेक्शन ले लिया। अर्जुन ने बताया कि हर महीने पांच से छह हजार रुपये बिल आता था।
कुछ महीने पहले मीटर चेक करने आए कर्मचारी केके सिंह ने मीटर स्लो चलने की बात कहते हुए कहा कि बिजली के इस्तेमाल के हिसाब से आठ से दस हजार रुपये बिल आना चाहिए।
केके सिंह ने कहा कि बाद में समस्या आएगी इसलिए अलग से रुपया जमा करते रहें। अर्जुन ने हर महीने पांच से छह हजार रुपये अलग से जमा करने शुरू कर दिए। इसकी उन्हें रसीद भी दी जाती रही।
बकौल अर्जुन छह महीने में उन्होंने 35,000 रुपये जमा कर दिए। दो हफ्ते पूर्व बिल एडजेस्ट कराने की बात कहकर केके सिंह उन्हें ऑफिस ले गया। यहां जब बिल निकाला गया तो क्लर्क ने 90,000 रुपये का बकाया दिखा दिया।
क्लर्क ने कहा कि जो रकम जमा है, उसके अलावा 60,000 रुपये और देने होंगे। सेटिंग से बिल कम कराने की बात कहते हुए केके सिंह उसे क्लर्क राम प्रकाश यादव के पास ले गया।
9 दिसंबर को राम प्रकाश यादव ने अर्जुन से 25,000 रुपये देने पर बिल 35,000 करने की बात कही। 10 दिसंबर को अर्जुन रुपये लेकर पहुंचे तो राम प्रकाश ने 30,000 रुपये की डिमांड रख दी।
अर्जुन ने पहले 25,000 रुपये में सौदा तय होने की बात कही तो उसने काम करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अर्जुन इंदिरा भवन स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो गए और एसपी से शिकायत की।
एसपी ने इंस्पेक्टर बीएस चौहान को केस की छानबीन कर ट्रैपिंग के लिए लगाया। ब्यूरो की टीम के साथ अर्जुन ने राम प्रकाश से लेन-देन की बातचीत की। दोनों के बीच फोन पर आठ-दस बार बातचीत हुई।
इसमें क्लर्क उसे बिल के 90,000 रुपये कंप्यूटर में फीड करने की धमकी देता रहा। क्लर्क का कहना था कि कंप्यूटर में दर्ज होने के बाद वह कुछ नहीं कर सकेगा।
उसने अर्जुन से 30,000 रुपये लेकर ऑफिस आने की बात कही। बृहस्पतिवार दोपहर एंटी करप्शन ब्यूरो का एक दरोगा ठेकेदार बनकर अर्जुन के साथ यूपीआईएल पहुंचा।
उस वक्त वहां सरदार नाम का एक दलाल भी मौजूद था। अर्जुन ने जैसे ही राम प्रकाश यादव को रुपये दिए पुलिस ने दबोच लिया।