कोविड-19 ने छीना चैन, पढ़ाई व करियर की चिंता में डूबा युवा, रिपोर्ट में खुलासा
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कोविड 19, लॉकडाउन और अब अनलॉक...। धीरे-धीरे ये इंतजार लगातार बढ़ रहा कि आखिर कब जाएगा कोरोना। इस सवाल का जवाब सभी ढूंढ रहे हैं कि हालात कब सामान्य होंगे। बढ़ता संक्रमण अनिश्चितिता बढ़ा रहा है। अनलॉक होने के बाद भी करियर के सारे रास्ते लॉक हैं।
शिक्षा अभी भी लॉकडाउन में फंसी है। समय के साथ युवाओं के दिल की धड़कन उनके भविष्य को लेकर बढ़ती जा रही है। चिंता के बढ़ते ग्राफ का सच मुस्कुराएगा इंडिया अभियान की पहली रिपोर्ट में सामने आया है। खास बात है कि अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर परेशान होने वालों की उम्र महज 19-25 साल के बीच है।
मौज-मस्ती, सपने देखने, उड़ान भरने की इस उम्र में युवाओं में करियर को लेकर बढ़ता तनाव उनके परिवार की चिंता का कारण भी बन रहा है। मुस्कुराएगा इंडिया एनएसएस व यूनिसेफ का संयुक्त अभियान है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में 300 काउंसलर लगातार युवाओं के संपर्क में हैं। वे न सिर्फ समस्याएं सुनते हैं, बल्कि लगातार उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं।
तनाव के कारण को इससे समझिए: प्रमोशन से पास होने की खुशी नहीं, कोई नेट क्वालिफाई होकर रोजगार को परेशान
मेंटल हेल्थ काउसंलर डॉ. शाहीन फातिमा खान बताती हैं कि विश्वविद्यालय ने प्रमोशन देकर साल खराब होने से बचाने का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन ऐसे छात्र बड़ी संख्या में है, जिन्होंने दो सालों का परसेंटेज सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत की थी। अब कोविड के कारण परीक्षा न होने से मेहनत पर पानी फिर गया। इसी तरह डिग्री लेकर बैठे युवा रोजगार को लेकर परेशान हैं।
आश्चर्यजनक किंतु सच: कोविड के पहले सामान्य रहता था नजरिया
रिपोर्ट बताती है कि 64 फीसदी कॉलर ऐसे हैं जिन्होंने शिक्षा व करियर को लेकर पहले कभी चिंता नहीं की। कोविड के चलते पहली बार लोगों ने शिक्षा, करियर और भविष्य की चिंता करनी शुरू की है। युवाओं ने काउंसलर से स्वीकारा कि पहली बार वे इतनी गहराई से चिंतन कर रहे हैं। सिर्फ 28 फीसदी लोगों ने बताया कि ये समस्याएं कोई नई नहीं हैं, बल्कि कोविड से पहले भी थीं। शेष लोगों का मानना था कि ये आगे भी बनी रहेंगी।
विवाहित युवाओं की चिंता रोजगार
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि युवकों में रोजगार की चिंता ज्यादा दिखी। फोन करके रोजगार की चिंता जताने वाले व हल पूछने वालों में 75 फीसदी युवक हैं, जबकि युवतियों का प्रतिशत महज 25 है। इसी तरह पढ़ाई की चिंता लड़कियों को ज्यादा है। लड़कों की तुलना में लड़कियों के फोन ज्यादा आए। यह प्रतिशत 54 और 46 हैं। अंशुमालि शर्मा कहते हैं कि कॉलर में 50 फीसदी युवक विवाहित हैं। इनके सामने परिवार का भरण-पोषण बड़ी समस्या है।
ग्रामीणों तक पहुंचा तनाव
यह रिपोर्ट करीब 1200 कॉल्स और उनकी काउंसलिंग पर आधारित है। आमतौर पर कहा जाता था कि शहरी जीवन के तनाव से ग्रामीण अभी दूर हैं। यह चिंताजनक है कि कोविड के चलते तनाव की लहर ग्रामीणों तक पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, फोन करने वालों में 49 फीसदी ग्रामीण हैं। वे भी आर्थिक स्थिति को लेकर जबर्दस्त तनाव में हैं। कुल कॉलर्स में 57 फीसदी युवक और 43 फीसदी युवतियां हैं। इसमें स्नातक युवाओं का प्रतिशत 47 है।
आंकड़ों में जानिए : किस समस्या को लेकर सबसे ज्यादा आए फोन
- 37 फीसदी शिक्षा की समस्या
- 14 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी
- 12 फीसदी आर्थिक समस्या
- 12 फीसदी परिवार के मुद्दे
- 10 फीसदी शारीरिक स्वास्थ्य
- 7 फीसदी रोजगार
- 4 फीसदी भोजन से संबंधित
हमारी कोशिश हर आम-ओ-खास मुस्कुराता रहे
कोविड-19 ने आज और कल को लेकर लोगों में तनाव व अवसाद को बढ़ा दिया है। प्रदेश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में मुस्कुराएगा इंडिया अभियान शुरू किया गया। इसका मकसद स्टूडेंट्स और आम लोगों की काउंसलिंग कर उनके तनाव को दूर या कम करना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना है। - अंशुमालि शर्मा, विशेष कार्याधिकारी व राज्य संपर्क अधिकारी एनएसएस उच्च शिक्षा विभाग, उप्र. शासन
काउंसलर लगातार स्टूडेंट्स के संपर्क में
बहुत ही कम समय में एनएसएस ने टेली कॉलिंग सिस्टम विकसित किया। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों को काउंसलर नियुक्त किया गया। काउंसलर लगातार स्टूडेंट्स के संपर्क में हैं। युवाओं के बड़ी संख्या में फोन आ रहे हैं और उनके तनाव का कम करने के लिए प्रयास जारी है। - भाई शैली, कम्युनिकेशन फार डवलपमेंट स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ