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अनधिकृत पंचायत भवनों की मुकदमेबाजी पर अदालत सख्त, प्रमुख सचिव से जवाब-तलब

Sun, 29 Nov 2020 07:26 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 29 Nov 2020 07:26 PM IST
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Court strict on unauthorized panchayat buildings litigation
लखनऊ हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के गांवों में पंचायत भवनों के अनधिकृत निर्माण के विवादों को लेकर रोज बड़ी संख्या में दायर हो रही याचिकाओं के मामले का सख्त संज्ञान लेकर प्रमुख सचिव पंचायतीराज से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते में निजी हलफ़नामा दाखिल कर उसमें यह जिक्र करने के निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के गांवों में पंचायत भवनों के निर्माण सम्बंधी कितनी याचिकाएं दायर हुयी हैं। यह भी पूछा है कि ऐसे विवादों में लोगों को राहत देने की क्या कारवाई की जानी है, जिससे इस सम्बन्ध में भविष्य में मुकदमेबाजी न हो।
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न्यायमूर्ति पंकज मितल और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह आदेश बहराइच जिले के नानबच्चा की जनहित याचिका पर दिया। याची का कहना था कि बहराइच की पयागपुर तहसील में विशेश्वर गंज विकास खंड के गांव सरकाही में स्थित गाटा संख्या 78/02 को पंचायत भवन के लिए चिन्न्हित किया गया है लेकिन इसे गांव के गाटा संख्या 34 पर बनाया जा रहा है।
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अदालत ने कहा कि हम देख रहें है कि प्रतिदिन प्रदेश के गांवों में पंचायत भवनों के अनधिकृत निर्माण सम्बंधी याचिकाएं कोर्ट के सामने आ रही हैं। ऐसे हालात का संज्ञान लेकर हमें पीड़ा हुई। हालांकि, संबंधित सरकारी विभाग इस तरह की अनावश्यक मुकदमेबाजी को रोकने की कोई कारवाई नहीं कर रहा है। लोगों की ऐसी व्यथाओं के समाधान का कोई फोरम भी नहीं है। इस तरह के विवादों के लिए कुछ सरकारी कर्मियों को जिम्मेदार व जवाबदेह बनाया जाना चाहिए लेकिन ऐसा लगता है कि इसको लेकर कोई प्रावधान नहीं है। 
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कोर्ट ने कहा कि इन हालत में हम न सिर्फ सरकारी वकील को सरकार से निर्देश लेकर जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं बल्कि प्रदेश के प्रमुख सचिव पंचायतीराज को भी दो हफ्ते में निजी हलफ़नामा दाखिल कर उसमें यह जिक्र करने का निर्देश दिया जाता  है कि प्रदेश के गांवों में पंचायत भवनों के निर्माण सम्बंधी कितनी याचिकाएं दायर हुयी हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव से  यह भी पूछा है कि ऐसे विवादों में लोगों को राहत देने की क्या कारवाई की जानी है, जिससे इस सम्बन्ध में भविष्य में मुकदमेबाजी न हो। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
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