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बैडमिंटन अकादमी में खिलाड़ियों के यौन शोषण मामले पर कोर्ट सख्त, कहा- जमानत के काबिल नहीं अपराध

Thu, 29 Nov 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 29 Nov 2018 11:54 AM IST
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court strict in sexual abuse case of the BBD UP badminton academy
डेमो

बाबू बनारसीदास बैडमिंटन अकादमी में महिला बैडमिंटन खिलाड़ियों के यौन शोषण व प्रताड़ना मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद सख्त रुख दिखाते हुए आरोपी निशांत सिन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उस पर लगे आरोप बेहद गंभीर किस्म के अपराध के हैं। 

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यह भी कहा कि ‘सिन्हा ने अपनी अथॉरिटी का दुरुपयोग किया, पद और शक्ति का उपयोग खिलाड़ियों के शोषण में किया गया। वे तो अपना कॅरिअर बनाने आई थीं, बदकिस्मती से शोषण की शिकार हो गईं।
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सिन्हा के रसूख को देखते हुए इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि वह गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा।

अगर उसे मामले के इस चरण में जमानत दी जाती है तो न्याय का गला घोंटे जाने का खतरा बना रहेगा। निशांत ने जमानत याचिका दायर कर कहा था कि गोमती नगर विपिनखंड स्थित बीबीडी उप्र बैडमिंटन एकेडमी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने उप्र बैडमिंटन एसोसिएशन की कार्यकारी समिति के आदेश पर उसके व उसके पिता विजय प्रकाश के खिलाफ एफआईआर करवाई थी।
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वह उस समय वहां पदेन सचिव और पिता सचिव था। एफआईआर में यौन शोषण, धोखाधड़ी सहित पॉक्सो एक्ट में आरोप दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान अकादमी की ओर से बताया गया कि खिलाड़ियों ने यौन शोषण से लेकर डराने धमकाने और शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन ने इनकी जांच रिटायर्ड जिला जज की एक सदस्यीय समिति से करवाई, जो सही पाए गए।

चार युवा खिलाड़ियों के यह थे आरोप

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डेमो
खिलाड़ी 1 : संबंध बनाने से इनकार किया तो खिलाड़ियों संग प्रैक्टिस रोकी
18 साल की इस खिलाड़ी ने बताया था कि वह और उसके भाई ने अकादमी में दाखिला लिया था। कुछ समय बाद उसके भाई को दबाव डालकर निकाल दिया गया। इसके बाद निशांत ने खिलाड़ी को मुफ्त प्रशिक्षण का ऑफर दिया। पर आरोपी के गलत इरादे को भांपते हुए उसने नकार दिया। कुछ समय बाद निशांत ने उससे संबंध बनाने का दबाव बनाया। इनकार पर निशांत ने बाकी खिलाड़ियों को उसके साथ प्रैक्टिस करने से मना करवा दिया। अकादमी छोड़नी चाही तो बंधक बना लिया गया। उसे छह घंटे खड़े रहने की सजा दी गई, पिटाई की गई। 

खिलाड़ी 2 : 16 साल की खिलाड़ी से दुष्कर्म की कोशिश
 16 साल की खिलाड़ी पश्चिम बंगाल से लखनऊ आकर बैडमिंटन की शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग ले रही थी। यहां खिलाड़ी को पश्चिम बंगाल छोड़कर उप्र का खिलाड़ी बनने का दबाव डाला गया। उसने ऐसा किया। पर, इसके बाद उसे मानसिक रूप से परेशान करने, रैगिंग और अन्य तरह से तंग करने का सिलसिला शुरू हो गया। उसे कहा गया कि निशांत ही उसकी रक्षा कर सकता है। उसे गलत संकेत दिए गए, जिनका बैडमिंटन से कोई लेना-देना नहीं था। कुछ और खिलाड़ी भी रैगिंग करते। निशांत ने दुष्कर्म की कोशिश की। विरोध किया तो धमकाया। ऐसे में उसने अकादमी छोड़ दी।

सरकार ने कहा, खिलाड़ियों के भविष्य और समाज पर हुआ असर

खिलाड़ी 3 : जूतों-रैकेट से पिटवाया
तीसरी खिलाड़ी ने बताया कि उसे हर तरह से दबाव में रखा जाता था। अन्य महिला खिलाड़ियों से उसे जूतों, लकड़ियों और रैकेट से पिटवाया जाता। रात में डरावनी कहानियां सुनाकर उसे अपने साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा जाता।

खिलाड़ी 4 : राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी को अकादमी से बाहर किया
एक नेशनल प्लेयर ने बताया कि वह 2009 में अंडर 16, अंडर 19 आयुवर्ग और सीनियर वर्ग में नेशनल स्तर के मुकाबलों में खेल चुकी थी। उसने आरोप लगाया कि निशांत ने अकादमी के प्रमुख के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। जब इसका उसने विरोध किया तो उसे अकादमी से बाहर निकाल दिया गया।

सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार सिंह ने बताया कि अकादमी में खिलाड़ियों को दबाव और रसूख के दम पर दबाया गया। आरोपी और उसके पिता के हाथों प्रतिभावान खिलाड़ी प्रताड़ित हुई हैं।

उनका भविष्य बर्बाद कर दिया गया। याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िताओं की उम्र, इस घटना की वजह से उनके भविष्य और समाज पर हुए असर और ट्रायल की स्टेज का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। लिहाजा उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए। 
 
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