कोर्ट का फैसलाः फिर से नहीं होगी यूपी-पीसीएस की परीक्षा
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उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा परीक्षा (प्रारंभिक) परीक्षा दोबारा आयोजित नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा दोबारा कराने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। प्रारंभिक परीक्षा गत 29 मार्च को हुई थी।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति रोहिंग्टन नरीमन की पीठ को बताया कि मुख्य परीक्षा शुरू हो चुकी है। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने का कोई मतलब नहीं है।
अटार्नी जनरल की इस दलील के बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी। पल्लवी राय समेत कुछ अन्य परीक्षार्थियों ने याचिका दायर की थी। इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जिस परीक्षा केंद्र पर प्रारंभिक परीक्षा का पहला पेपर लीक हुआ था, वह पंजीकृत परीक्षा केंद्र नहीं था।
बताया कैसे लीक हुआ था पेपर
साथ ही इस परीक्षा केंद्र के सुपरवाइजर पेपर लीक में शामिल थे। भूषण ने कहा कि सुपरवाइजर ने ही मोबाइल द्वारा प्रश्न पत्र को बाहर भेजा और वॉट्स एप के जरिए छात्रों तक प्रश्नों के उत्तर पहुंचाए गए।
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट में भी मोबाइल के जरिए छात्रों को उत्तर मुहैया कराए गए। भूषण ने कहा कि ये कहा जा रहा है कि सिर्फ पहला पेपर ही लीक हुआ था लेकिन इसकी पूरी आशंका है कि दूसरा पेपर भी लीक हुआ होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा याचिका ठुकराए जाने के बाद छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा गत 29 मार्च को आयोजित हुई थी। 917 केंद्रों पर हुई इस परीक्षा में करीब साढ़े चार लाख लोग शामिल हुए थे।
परीक्षार्थियों का आरोप था कि परीक्षा शुरू होने से पहले सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र लीक हो गए थे। लिहाजा यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जानी चाहिए क्योंकि यह हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल है। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की थी।