आजम को कोर्ट से राहत, मिला और वक्त!
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लाभ के दोहरे पद के आरोप संबंधी मामले में कैबिनेट मंत्री आजम खां व राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का और वक्त दिया है।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश अधिवक्ता अशोक पांडेय के जरिये दायर एक लंबित याचिका पर दिया।
याचियों के अधिवक्ता का आरोप है कि कैबिनेट मंत्री रहते आजम खां मौलाना अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर के चांसलर भी हैं। यह कानून की मंशा के खिलाफ है और दोहरे लाभ के पद की जद में आता है।
इससे पहले 25 सितंबर 2014 को कोर्ट ने इस आरोप के मद्देनजर आजम खां को नोटिस जारी कर उन्हें और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया था। उस वक्त सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से इस आरोप का विरोध किया गया था।
नहीं दे पाए कोई जवाब
अधिवक्ता पांडेय के मुताबिक गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व आजम खां की तरफ से जवाब नहीं दाखिल हो सका। इस पर अदालत ने इसके लिए चार हफ्ते का और वक्त देकर मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में नियत की है।
न्यायाधीशों की नियुक्ति मामले में सुनवाई 12 को
वहीं, हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सिर्फ राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफारिशों पर ही सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति किए जाने की गुजारिश वाली पीआईएल पर अगली सुनवाई 12 मार्च को नियत की है।
न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अताउर्रहमान मसूदी की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश चार स्थानीय वकीलों की खंडपीठ की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन के जरिये दायर पीआईएल पर दिया। इसमें केंद्र व राज्य सरकार समेत अन्य को पक्षकार बनाया गया है।