सुखद: बिगड़ते रिश्तों को बचाने के लिए जी जान लगा रहे पति-पत्नी, कितना भी बड़ा झगड़ा हो खत्म करने को तैयार
दंपती अपने झगड़ों को सुलझाने के लिए खुद आगे आ रहे हैं। मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यह स्थिति निश्चित तौर पर गंभीर है, लेकिन इस नकारात्मक नतीजों के बीच सुखद संकेत भी मिल रहे हैं। लोग परिवार की अहमियत को समझ रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आदमी चाहता है कि वो जो कह रहा है वही हो और घर की महिलाएं थोपी हुईं चीजों को स्वीकारना नहीं चाहती हैं। परिणाम विवाद बढ़ रहे हैं और रिश्ते टूट रहे हैं। मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जितने भी मामले उनके पास रिपोर्ट होते हैं, उनमें 50 फीसदी मामले दंपती के विवाद के हैं। यह स्थिति निश्चित तौर पर गंभीर है, लेकिन इस नकारात्मक नतीजों के बीच सुखद संकेत भी मिल रहे हैं। अब पति-पत्नी दोनों ने रिश्तों को सुधारने की पहल खुद की है और काउंसिलिंग सेशन लेने की पहल कर रहे हैं। निजी काउंसलर हों या 181 वन स्टॉप सेंटर में आने वाले आवेदन, काउंसिलिंग की पहल पत्नी की ओर से की जा रही है। खास बात है कि बिना किसी जोर-जबर्दस्ती के पति काउंसिलिंग सेशन के लिए समय से पहुंच रहे हैं।
झगड़ा कितना भी बड़ा हो, खत्म करने को तैयार
केस-1: शहर के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्था में काम करने वाली पत्नी को मिलेट्री में उच्च पद पर तैनात पति से शिकायत बहुत है। शादी के 15 साल हो गए, पर वे एक-दूसरे से दूर हैं, लेकिन अब अपने रिश्ते को मौका देना चाहते हैं। पत्नी ने इसके लिए मनोवैज्ञानिक से बात की, पहले खुद की काउंसिलिंग करवाई और फिर पति को इसके लिए राजी किया। दोनों ने नियमित रूप से सेशन लेना शुरू किया, नतीजा 15 साल बाद वे एक साथ रहने के लिए खुद को तैयार पा रहे हैं।
केस-2: शहर का एक रसूखदार परिवार। पति का अफेयर किसी से चल रहा। पत्नी को पता चला, झगड़े हुए, लेकिन पत्नी ने खुद ही मामले को सुलझाने की पहल की। इसके लिए उसने काउंसलर की मदद ली है। फिलहाल पति को समझाकर काउंसिलिंग के लिए राजी किया है। दोनों ने अपनी-अपनी कमियों को स्वीकारा और वे नए सिरे से वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने को तैयार हैं।
‘इमोशनली इंटेलीजेंट’ की बढ़ती भूमिका
बोधी ट्री इंडिया की मनोवैज्ञानिक डॉ. नेहा आनंद का कहना है कि शादी या किसी भी रिश्ते की सफलता के लिए इमोशनली इंटेलीजेंट होना बहुत जरूरी है। ये सच है कि लोगों में आपसी मतभेद बढ़े हैं। मेरे खुद के पास आने वाले मामलों में 50 फीसदी केस पति-पत्नी के बीच बढ़ते क्लेश के होते हैं, लेकिन रिश्ते सुधारने की पहले भी उन्हीं की तरफ से हो रही है, ये अच्छी बात है। ज्यादातर मामलों में दंपती खुद ही आ रहे हैं। यह संकेत इस बात का भी है कि वे एक दूसरे का महत्व समझ रहे हैं, परिवार की महत्ता को स्वीकार करते हैं। सिर्फ अहम का टकराव उनके झगड़े का कारण बन रहा है।
संवाद को स्वीकार करने की प्रवृत्ति नई
181 वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह कहती हैं कि छह महीने में करीब 735 मामले पारिवारिक विवाद के आए हैं। इनमें से करीब 450 केस का समाधान हो चुका है। कुल मामलों में 30 फीसदी आवेदन ऐसे हैं जिन्होंने आरोप-प्रत्यारोप से दूर जाकर काउंसिलिंग की इच्छा जताई है। काउंसिलिंग के छह सेशन होते हैं, इनमें हर बार नई चीज सामने आती है, जो समाधान में मददगार साबित होती है। छह महीने में झगड़ों को आपसी संवाद से निपटाने के लिए काउंसिलिंग की पहल करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यह नया ट्रेंड अच्छे नतीजे का संकेत दे रहा है।