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इलाज कराने आई थी फंस गई दलाल के चंगुल में

Tue, 10 Feb 2015 01:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 10 Feb 2015 01:38 PM IST
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corruption in balrampur hospital.

भाभी का इलाज कराने लेकिन बलरामपुर अस्पताल में पहुंची युवती जब दलाल के चंगुल में फंसकर बेबस हो गई तो वहीं फूट-फूटकर रोने लगी।

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जब लड़की से रोने का कारण पूछा गया तो बलरामपुर अस्पताल के चेस्ट रोग विभाग के कमरा नंबर 17 में चल रहे गोरखधंधे का खुलासा हुआ।

इस मामले की सूचना डीएम तक पहुंची तो उन्होंने पूरे मामले की जांच सीएमओ से कराने के निर्देश दिए। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया।

बलरामपुर अस्पताल में सोमवार को ओपीडी चल रही थी। दोपहर 12 बजे चेस्ट रोग विभाग में डॉ. राजेश कुमार की ओपीडी थी।
 
वह कमरे में मौजूद नहीं थे लेकिन वहां बैठा व्यक्ति मरीजों को देख रहा था और दवाएं बाहर से खरीद कर लाने के लिए कह रहा था।

मरीजों पर बनाता था दवाब

corruption in balrampur hospital.

वो मरीजों पर बाहर से कफ सीरप खरीदने के लिए दबाव भी बना रहा था। इसी समय एक लड़की अपनी भाभी को लेकर कमरा नंबर 17 में पहुंची।

वहां बैठे दलाल ने पर्चा लिया और जांच के बाद बाहर से दवा लाकर दिखाने को कहा। युवती दवा लेने के लिए कई मेडिकल स्टोर गई लेकिन दवा नहीं मिली।
 
इस पर वह वापस लौट आयी और डॉक्टर समझ कर दलाल से अस्पताल की दवाएं दिलाने के कहा। इस पर दलाल ने उसे डांटते हुए कहा कि पहले वो उसकी लिखी दवा लेकर आए इसके बाद और दवा मिलेगी।

दलाल की बदतमीजी से लड़की सहम गई और बुरी तरह रोने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने रोने का कारण पूछा तो उसने पूरी बात बतायी।

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डर की वजह से नहीं की शिकायत

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इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने दलाल को घेर लिया। वहां मौजूद अन्य कर्मचारी जो पहले दलाल की मदद कर रहे थे उसके विरोध में खड़े हो गए।

इसी बीच पूरे मामले की सूचना निदेशक डॉ. यूएन राय को दी गई लेकिन वो दलाल वहां से भाग निकला। इसके बाद पीड़ित लड़की ने इलाज न होने के डर से किसी भी तरह की शिकायत अस्पताल प्रशासन से नहीं की।

बड़ा अस्पताल है सब पर नहीं रख सकते नजर: डॉ. राय घटना की जानकारी मिलने पर अस्पताल के निदेशक डॉ. यूएन राय ने भी इस मामले में गैर जिम्मेदाराना रैवया अपनाया।

उनका कहना था कि अस्पताल बहुत बड़ा है और बहुत मरीज आते हैं, सब पर कैसे नजर रखी जा सकती है। हालांकि इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद जिलाधिकारी राजशेखर ने तुरंत सक्रिय होते हुए सीएमओ को मामले की जांच कर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

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