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करीब एक महीने से घरों में कैद कर्मचारी पहुंचे दफ्तर, ज्यादा उपस्थिति ने बढ़ा दी टेंशन

Tue, 21 Apr 2020 12:30 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 21 Apr 2020 12:30 AM IST
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corona virus in up Employees came to office on Monday after about a month
थर्मल स्क्रीनिंग करते हुए - फोटो : अमर उजाला
करीब एक महीने से घरों में कैद कर्मचारियों को सोमवार को घर की लक्ष्मण रेखा से बाहर ऑफिस आने का मौका मिला। लेकिन, इससे कर्मियों में उत्साह की जगह चिंता ज्यादा नजर आई। ऐसे लोग ज्यादा मिले जिन्हें राजधानी की संवेदनशील स्थिति के मद्देनजर सचिवालय में उपस्थिति बढ़ाने का कदम जल्दबाजी व जोखिमभरा लग रहा है। 
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प्रदेश में 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद से सचिवालय में अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े विभाग ही खुल रहे थे। पिछले दिनों सरकार ने विशेष सचिव स्तर तक के अधिकारियों व अधिकतम 33 फीसदी कर्मियों को ऑफिस आने के लिए अनिवार्य किया, तब भी ज्यादा भीड़ नजर नहीं आई। 
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लेकिन, अनुभाग अधिकारी, अनुसचिव, संयुक्त सचिव व उप सचिव की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने से सचिवालय में कर्मियों की संख्या काफी बढ़ गई। सोमवार को ऑफिस आए कर्मी काफी जागरूक व सतर्क दिखे। ज्यादातर कर्मी मास्क लगाए और सैनिटाइजर लेकर आए। कई ग्लब्स भी लगाए दिखे। हालांकि जगह-जगह सोशल डिस्टेंसिंग के निर्देशों का अभाव नजर आया।
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सचिवालय प्रशासन विभाग ने कर्मचारियों की उपस्थिति बढ़ने पर ध्यान देते हुए सचिवालय के हर भवन के गेट पर थर्मल स्कैनर और सैनिटाइजर की व्यवस्था कराई है। कर्मचारी थर्मल स्कैनिंग कराने व सैनिटाइज होने के बाद ही गेट से आगे बढ़ पाए। सुबह कर्मियों को स्कैनिंग कराने के लिए बारी का इंतजार करना पड़ा। बिना मास्क किसी को प्रवेश की इजाजत नहीं मिली। यह जिम्मेदारी सचिवालय सुरक्षाकर्मियों ने संभाली। 
 

... लेकिन कर्मी भयग्रस्त, अभी अत्यावश्यक सेवाओं तक सीमित रखने की आवाज

तमाम एहतियात व सतर्कता के बावजूद कर्मी राजधानी में कोरोना संक्रमण व पॉजिटिव केसों का हवाला देते हुए चिंता जताते नजर आए। सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र व कोषाध्यक्ष गोपीकृष्ण श्रीवास्तव ने बताया कि लखनऊ की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। 

वायरस को लेकर कोई कुछ नहीं जानता है। अधिक संख्या में कर्मियों की उपस्थिति से कोरोना संक्रमण को लेकर कर्मी भयग्रस्त हैं। तनिक भी असावधानी सब किए धरे पर पानी फेर सकती है। मिश्र ने कहा कि अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े विभाग पहले से ही खुल रहे हैं। 

आवश्यक कार्य पर कभी भी किसी को बुलाने की व्यवस्था बनी हुई है। मुख्यालय व निदेशालय बंद हैं। ऐसे में एक तिहाई कर्मियों व समस्त अनुभाग अधिकारियों तक उपस्थिति केवल भीड़ बढ़ाने वाला जोखिम भरा निर्णय साबित हो सकता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध न होने से महिलाओं व उम्रदराज कर्मियों को काफी परेशानी हो रही है। 

 

सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन से इस संबंध में मिलकर आग्रह किया गया है। राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष शिव गोपाल सिंह ने भी सचिवालय को अत्यावश्यक सेवाओं तक सीमित रखने की जरूरत बताई है। 

उन्होंने कहा है कि महिलाओं को पूरी तरह से ड्यूटी से मुक्त करना चाहिए। कंप्यूटर सहायक व सहायक समीक्षा अधिकारी संघ के अध्यक्ष संजय यादव का कहना है कि हर कोई ड्यूटी करना चाहता है। सतर्कता बरत रहा है, लेकिन हर कोई भयग्रस्त नजर आ रहा है। फिलहाल तीन मई तक अत्यावश्यक सेवाओं तक ही उपस्थिति अनिवार्य करनी चाहिए।
 
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