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कोरोना का असर : लखनऊ में बैंकों के हर माह फंस रहे 350 करोड़

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 02:05 AM IST
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corona pandemic causing loss to banks
अतुल भारद्वाज, लखनऊ। लॉकडाउन ने बैंकों पर संकट खड़ा कर दिया है। उद्यम और बाजार में बिक्री बंद हुई तो कर्ज की वसूली भी फंस गई। अकेले लखनऊ में निजी और सरकारी क्षेत्र की बैंकों को मिलाकर करीब 350 करोड़ रुपये की वापसी हर महीने फंस रही है। वहीं, इसने 30 जून तक मिली किश्त अदायगी में छूट के बाद नॉन परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) बढ़ने का संकट भी पैदा कर दिया है। जिले की लीड बैंकर बैंक ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड के मुताबिक सबसे बड़ा संकट माइक्रो स्मॉल और मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर का है। इसकी वजह यह है कि बैंकों का ज्यादातर कर्ज छोटे-बड़े व्यापारियों और उद्यमियों के पास ही है। मार्च के बाद इस पूरे सेक्टर में काम बंद है। दुकानें तक नहीं खुली हैं। ऐसे में कर्ज वापसी भी नहीं हो पा रही है। आने वाले दिनों में भी लीड बैंक हालात सुधरते हुए नहीं देख रहा है। लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर विनोद बिहारी मिश्र का कहना है कि नई रिपोर्ट में 31 मार्च तक बैंकों ने 50,674 करोड़ रुपये कर्ज दिया हुआ है। इसमें से कृषि सेक्टर के 3245 करोड़ रुपये कम कर दें तो बाकी एडवांस का करीब 10 प्रतिशत रिटर्न आना चाहिए। यह करीब 395 करोड़ रुपये होता है। होम लोन और एजुकेशन लोन जैसे सेक्टर में आंशिक वसूली को घटा दें तो करीब 350 करोड़ रुपये वापस बैंकों में नहीं आए। कृषि सेक्टर से करीब आठ करोड़ रुपये ही वापस आने होते हैं। 30 जून के बाद छूट बढ़ाएगी संकट कोरोना संकट में अभी एमएसएमई और दूसरे सेक्टर सरकार से कर्ज की किश्तों की अदायगी में 30 जून से आगे तीन महीने का समय और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में बैंकों के पास जुलाई की जगह अक्तूबर में वसूली शुरू करने का मौका होगा। अगर 90 दिन में पुराना पैसा बैंकों को नहीं मिला तो इस कर्ज को एनपीए घोषित करना होगा। वहीं, छह महीने की किश्तों की वसूली कर जमा तीन महीने में कराना बैंकों के लिए कठिन होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि उद्यमियों की हालत पहले ही खराब हो चुकी होगी। किस सेक्टर पर कितना कर्ज कृषि सेक्टर - 3245 करोड़ रुपये एमएसएमई सेक्टर - 10585 करोड़ रुपये अन्य प्राथमिकता सेक्टर - 8869 करोड़ रुपये कुल प्राथमिकता सेक्टर - 22699 करोड़ रुपये कमजोर आय वर्ग सेक्टर - 2298 करोड़ रुपये (अन्य प्राथमिकता सेक्टर में बैंक एजुकेशन लोन, 30 लाख रुपये से कम के लोन आदि को रखते हैं। कुल प्राथमिकता सेक्टर में पांच करोड़ रुपये से अधिक के इंडस्ट्री लोन आदि रखे जाते हैं।) ग्रामीण इलाकों, सरकारी योजनाओं पर फोकस लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर विनोद बिहारी मिश्रा का कहना है कि बैंकों को अभी ग्रामीण इलाकों और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस करने के लिए कहा गया है। वैसे भी रियल एस्टेट की ओर से मांग कम होने से होम लोन भी अधिक जारी नहीं होंगे। जितनी मांग आएगी, उतने ही होम लोन जारी कर दिए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूह, किसान क्रेडिट कार्ड बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है। एमएसएमई सेक्टर को लोन बांटने के लिए भी विशेष अभियान रहेगा। यह काम एक जिला एक उत्पाद, पीएम रोजगार गारंटी जैसी योजनाओं में होगा।
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