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लखनऊ विश्वविद्यालय: दीक्षांत समारोह पर 15 मेधावियों को दिए गए मेडल, शिवांश मिश्रा को मिला चांसलर मेडल

Sat, 21 Nov 2020 03:07 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 21 Nov 2020 03:07 PM IST
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Convocation day of Lucknow University today
समारोह का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala

लखनऊ विश्वविद्यालय अपने शताब्दी उत्सव के साथ ही दीक्षांत समारोह मना रहा है। इस मौके पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 15 मेधावियों को मेडल वितरित किए। शिवांश मिश्रा को चांसलर गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। इस मौके पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के शतायु होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर के इस महान विवि के कुलाधिपति के रूप में उपस्थित होना मेरे लिए गर्व की बात है।

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राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन जीने की कार्यशाला है जितने ही विद्यार्थियों ने आज पदक प्राप्त किए हैं वो समाज के पिछड़ों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।
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उन्होंने कहा कि कोराना काल में विश्वविद्यालय ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई और पढ़ाई का नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन कक्षाएं भी संचालित की गईं। अनुसंधान के क्षेत्र में लविवि के एमओयू करके शोध के नए अवसर तलाश रहा है। इस अवसर पर उन्होंने पदक विजेताओं को बधाई और शिक्षकों को धन्यवाद दिया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने की और विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दीक्षांत का मतलब दीक्षा का अंत नहीं है। इसका अर्थ है कि नए जीवन में प्रवेश करना। यह समारोह शताब्दी वर्ष में हो रहा है इसलिए यह महत्वपूर्ण है। उन्होंन बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 1920 में अधिसूचना जारी की गई थी। यह हमारे लिए प्रसन्नता का विषय है कि हमारे यहां आचार्य नरेंद्र देव, राधा कमल मुखर्जी जैसे लोग पढ़कर निकले हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों में 14 पद्मश्री, 4 पद्मभूषण और दो पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आचार्य नरेन्द्र देव ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नजीर पेश की और कुलपति के रूप में बड़ा योगदान दिया। यहां तक कि अपना आवास भी विद्यार्थियों को रहने के लिए दे दिया। उन्होंने बताया कि 1864 में कैनिंग कॉलेज की स्थापना हुई थी इसे ही 1920 में विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।


उन्होंने कहा कि लविवि में ऑनलाइन पठन पाठन की व्यवस्था की गई है। 11760 ई कंटेंट भी लविवि ने प्रदेश को उपलब्ध कराए हैं। लविवि के निर्माण में तमाम लोग शामिल रहे हैं। विश्वविद्यालय के पास पांच लाख पुस्तकें हैं।

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