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KGMU में धर्मांतरण: डॉ. रमीज के मददगारों की जांच एसटीएफ से कराने की सिफारिश, किसी अन्य की नहीं मिली भूमिका

Mon, 12 Jan 2026 11:00 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 12 Jan 2026 11:00 PM IST
सार

केजीएमयू में धर्मांतरण के प्रयास मामले में किसी अन्य डॉक्टर की कोई भूमिका नहीं मिली है लेकिन मामला गंभीर होने के कारण कमेटी ने एसटीएफ से जांच कराने की सिफारिश की है।

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Conversion at KGMU: Recommendation for STF to investigate Dr. Rameez's aides, no role found for anyone else
डॉ. रमीज मलिक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

महिला रेजिडेंट के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास के आरोपी डॉ. रमीज मलिक के मददगारों का पता लगाने के लिए एसटीएफ जांच की सिफारिश की गई है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में पूर्व डीजीपी भावेश कुमार सिंह के नेतृत्व वाली सात सदस्यीय समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट फाइल की।

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केजीएमयू रेजिडेंट का धर्मांतरण कराने के मामले में तीन स्तरीय जांच हो रही थी। विशाखा समिति ने अपनी जांच में डॉ. रमीज मलिक को यौन शोषण का दोषी पाया था। दूसरी समिति धर्मांतरण के लिए दबाव डालने और आरोपी की मदद करने संबंधी आरोपों की जांच कर रही थी। इस समिति ने अपनी जांच में सीधे तौर पर किसी को दोषी नहीं पाया है लेकिन मामला गंभीर होने की वजह से एसटीएफ से जांच कराने की सिफारिश की है। जांच के दौरान समिति ने एक ईमेल आईडी जारी की थी। सभी विभागों से ऐसे किसी भी मामले की जानकारी देने की अपील की थी। हालांकि, समिति को किसी विभाग से धर्मांतरण संबंधी कोई साक्ष्य नहीं मिला।
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दो डॉक्टरों ने खुद निकलवाई अपनी कॉल डिटेल
केजीएमयू में पैथोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने खुद ही अपनी कॉल डिटेल निकलवाई है। उन पर डॉ. रमीज के मददगार होने का आरोप लगाया जा रहा था। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने भी विभाग के दो डॉक्टरों का नाम लेते हुए उन पर रमीज के मददगार होने का आरोप लगाया था। अपने आरोप में उपाध्यक्ष ने कॉल डिटेल में इसकी पुष्टि होने की बात कही थी। इसके बाद दोनों डॉक्टरों ने खुद ही अपनी कॉल डिटेल के लिए आवेदन किया। अब दोनों ने अपनी कॉल डिटेल कुलपति के माध्यम से आयोग को भेजने की बात कही है।

केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू की सात सदस्यीय समिति ने अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने मामले की जांच एसटीएफ से कराने की सिफारिश की है।

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