फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Contractors were benefited, and payments of Rs 45.75 crore were made against the rules.

Lucknow News: ठेकेदारों को पहुंचाया गया लाभ, नियम विरुद्ध किया 45.75 करोड़ का भुगतान

Sat, 21 Feb 2026 02:20 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:20 AM IST
विज्ञापन
Contractors were benefited, and payments of Rs 45.75 crore were made against the rules.
मेट्रो ट्रेन।
लखनऊ। मेट्रो के निर्माण और संचालन में भारी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर 45.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
विज्ञापन

सीएजी की जांच में पाया गया कि संयंत्र और मशीनरी की खरीद के लिए ठेकेदार ने कोई वैध बिल या चालान पेश नहीं किया था। इसके बजाय, केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट का मूल्यांकन प्रमाणपत्र जमा कर भुगतान उठा लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 31.74 करोड़ रुपये का भुगतान उन मशीनों के लिए किया गया जो ठेकेदार के पास पहले से थीं। इस राशि का उपयोग अन्य कार्यों में किया गया, जो सीधा नियम विरुद्ध लाभ है।
विज्ञापन

सीएजी ने इस 31.74 करोड़ रुपये की राशि को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ ठेकेदार से वसूलने की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, कार्यस्थल पर सामग्री के नाम पर भी 14.01 करोड़ रुपये का गलत भुगतान पाया गया है। सरकार ने इस संबंध में जो स्पष्टीकरण दिया, उसे सीएजी ने अस्वीकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बिना टेंडर 76.04 करोड़ का सुरक्षा अनुबंध

मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेसर्स जी4एस सिक्योर सॉल्यूशंस नामक कंपनी को वर्ष 2016 से 2023 तक बिना किसी निविदा प्रक्रिया के सीधे नामांकन के आधार पर सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया। यह चयन केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों और सामान्य वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। इस अवधि के दौरान फर्म को 76.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शुरुआत में मासिक भुगतान 32.72 लाख रुपये था, जो समय के साथ बढ़ता गया। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
टेंडर में खेल

रिपोर्ट में सीएजी ने मेसर्स गैमन इंडिया लिमिटेड के मामले में टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। तकनीकी मूल्यांकन समिति की हरी झंडी के बावजूद कंपनी की वित्तीय निविदा नहीं खोली गई। इस पर राज्य सरकार का तर्क था कि कंपनी का दिल्ली और चेन्नई मेट्रो में प्रदर्शन खराब था और सुरक्षा मानकों में कमी थी। सीएजी ने इस दलील को खारिज करते हुए पूछा कि यदि कंपनी की छवि खराब थी, तो उसे तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया में शामिल ही क्यों होने दिया गया।

बिना शुल्क जारी किया विज्ञापन शुल्क

मेट्रो ट्रेनों पर विज्ञापन के लिए वाराणसी की फर्म मेसर्स अभि एडवरटाइजिंग गोदौलिया को जो लाइसेंस दिया गया, उसमें भी अनियमितता मिली है। कंपनी को वर्ष 2019 में 12 ट्रेन सेट विज्ञापन के लिए सौंपे गए थे। नियमानुसार कंपनी से 93.32 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क वसूला जाना था, लेकिन इसे बिना किसी ठोस आधार के क्रेडिट नोट जारी कर माफ कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी को बिना किसी अग्रिम भुगतान के ही लाइसेंस जारी कर दिया गया, जो वित्तीय नियमों का उल्लंघन है।


तीन कार्यों की लागत बढ़ी, अनुमोदन नहीं लिया

मेट्रो के तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स (एलकेसीसी-3, 4 और 9) की शुरुआती अनुमानित लागत 337.70 करोड़ रुपये थी, जो बाद में 393.87 करोड़ रुपये हो गई। नियमानुसार इस बढ़ी हुई लागत का अनुमोदन आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से कराना अनिवार्य था, लेकिन कंपनी के प्रबंध निदेशक ने ही इसे मंजूरी दे दी। सीएजी के मुताबिक एमडी के अनुमोदित करने के कारण का सत्यापन नहीं किया जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed