दवा लेने से पहले पढ़ें ये खबर, चौंक जाएंगे आप
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बीमार हैं तो दुआ कीजिए। क्योंकि आप जो दवाएं ले रहे हैं वो चॉक, मिट्टी, सेक्रीन और कलर वाले फॉर्मूले से न बनी हो सकती हैं।
चौंकिए नहीं, माफिया इसी फॉर्मूले से दवा तैयार कर दुकानों से लेकर अस्पतालों तक पहुंचा रहे हैं। वह भी नामी कंपनियों की दवाओं की हूबहू पैंकिंग में।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की ड्रग इकाई की ओर से लैब टेस्टिंग के लिए भेजी गई दवाओं के सैम्पल की रिपोर्ट में ये सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं।
विटामिन, एंटीबायोटिक से लेकर जीवनरक्षक दवाएं तक नकली और मिलावटी बनाकर खपाई जा रही हैं। बलरामपुर जिला अस्पताल हो या फिर राम मनोहर लोहिया संयुक्त जिला चिकित्सालय या सीएमओ डिपो से मरीजों को बांटी जाने वाली कई दवाएं लैब में फेल पाई गई हैं।
जब दर्द में दवा न काम आए तो, जान लीजिए...
एफएसडीए की जिला ड्रग इकाई ने चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल 2014 से 31 जनवरी 2015 तक मार्केट से 108 दवाओं के नमूने सीलबंद कर जनविश्लेषण प्रयोगशाला में जांच को भेजे।
लैब रिपोर्ट बताती है कि इनमें से दर्द निवारक के बतौर इस्तेमाल में आने वाली जिफिक 200 जांच में पूरी तरह से नकली निकली।
इसे सिर्फ खड़िया व सेक्रीन के मिश्रण से तैयार किया गया था। वहीं दो दर्जन से ज्यादा नमूने घटिया पाए गए।
इनमें खासतौर से एसीडिटी में खाई जाने वाली दवाएं, दर्द निवारक, एंटीबायोटिक व कफ सिरप घटिया पाए गए।
एफएसडीए ने जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए आरोपी सप्लायर के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने के साथ दुकान का ड्रग लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की।