फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   consumer forum blames government for putting pressure on companies to hike electricity prices

'सरकार सब्सिडी का भुगतान करने में रही असफल, तो बिजली कंपनियों पर दबाव डालकर बढ़वाई दरें'

Thu, 05 Sep 2019 02:56 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 05 Sep 2019 02:56 PM IST
विज्ञापन
consumer forum blames government for putting pressure on companies to hike electricity prices
सांकेतिक तस्वीर
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार द्वारा नियामक आयोग पर दबाव डालकर बिजली दरें बढ़वाने का आरोप लगाया है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि सरकार ने बिजली कंपनियों को 2017-18 तक 15089 करोड़ रुपये सब्सिडी का भुगतान नहीं किया, जिसके चलते बिजली दरों में इजाफा हुआ है। सरकार की अक्षमता का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा। परिषद ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
विज्ञापन


उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक 2016-17 तक उदय स्कीम के तहत बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 11,852 करोड़ रुपये निकल रहा है। मंगलवार को जारी टैरिफ  आदेश में विद्युत नियामक आयोग ने भी यह मान लिया कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 10,793 करोड़ रुपये निकल रहा है। 
विज्ञापन


साथ ही 2017-18 के ट्रूअप आंकड़ों का मिलान करने के बाद यह राशि बढ़कर 13,337 करोड़ हो गई यानी आयोग के टैरिफ आर्डर के अनुसार 2017-18 तक बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 13337 करोड़ निकल रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नियामक आयोग ने बिजली दरों में इजाफा क्यों किया?
विज्ञापन
विज्ञापन

परिषद ने सवाल उठाया है कि जब उपभोक्ताओं की बिजली कंपनियों पर देनदारी बनती है तो दरें बढ़ जाती हैं लेकिन जब बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं की देनदारी बन रही है तो दरों में कमी क्यों नहीं की गई? यही नहीं 4.28 प्रतिशत रेगुलेटरी सरचार्ज खत्म तो कर दिया गया, लेकिन 2016-17 से अब तक इस मद में बिजली कंपनियों द्वारा अतिरिक्त वसूले गए करोड़ों रुपये उपभोक्ताओं को वापस दिलाने के बारे में आयोग ने चुप्पी साध रखी है। वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के तहत अगर उपभोक्ताओं के पक्ष में खड़ा होता तो दरों में भारी कमी होती।

नियामक आयोग ने टैरिफ  आर्डर में कहा है कि दरों में बढ़ोतरी से बिजली कंपनियों को 3872 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। अस्तित्व में आने के बाद पहली बार बिजली कंपनियों को 279 करोड़ रुपये का मुनाफा होने जा रहा है। इस राशि के एवज में किसानों की बिजली दरों में बढोतरी रोकी जा सकती थी। 

उपभोक्ता परिषद ने राज्य सरकार से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि बिजली कंपनियों के निकल रहे हजारों करोड़ रुपये के एवज में घरेलू शहरी ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में कमी कराई जाए। वर्मा ने कहा जल्द ही ऊर्जा मिलकर इस सबंध में बात की जाएगी। परिषद की ओर से नियामक आयोग में रिव्यू याचिका दाखिल की जाएगी। इसके बाद भी बात न बनी तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सरकारी विभागों पर 11 हजार करोड़ बकाया

आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि बिजली कंपनियों को 2017-18 तक राज्य सरकार से 15,089 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलनी थी जिसका भुगतान नहीं किया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि अतिरिक्त सब्सिडी सरकार नहीं देगी तो क्या उसका खामियाजा जनता भुगतेगी? यही नहीं सरकारी विभागों का लगभग 11 हजार करोड़ रुपये बकाया है। सरकार इसका भुगतान भी नहीं करा रही है। कुल मिलाकर सरकार अपनी अक्षमता का ठीकरा उपभोक्ताओं के सिर फोड़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed