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पूरी दुनिया में कहीं नहीं भारत जैसा संविधान: डॉ. लालजी निर्मल

Tue, 26 Nov 2019 01:05 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 26 Nov 2019 01:05 AM IST
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Constitution like India nowhere in the world said dr lalji nirmal
constitution of india - फोटो : फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी निर्मल ने कहा कि ‘भारतीय संविधान’ लोकतंत्र की सबसे मजबूत पुस्तक है। उन्होंने कहा कि संविधान शिल्पी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में रचित भारतीय संविधान जैसा संविधान पूरे विश्व में कहीं नहीं है।

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संविधान दिवस की पूर्व संध्या डॉ. भीमराव आंबेडकर महासभा में आयोजित सेमीनार में डॉ. निर्मल ने कहा कि 30 अगस्त 1974 को संविधान की प्रारूप समिति गठित की गई थी। इस समिति में अल्लादि कष्णा स्वामी अय्यर, एन.गोपाल स्वामी आयंगर, केएम मंशी, सैयद मुहम्मद शादुल्ला, वीएन मूर्ति, डीपी खेतान और डॉ. भीमराव आंबेडकर शामिल थे।
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उन्होंने कहा कि संविधान सभा के सदस्य टीटी कृष्णामाचारी ने 5 नवंबर 1974 को संविधान सभा में कहा था कि संविधान का प्रारूप तैयार करने में डॉ. आंबेडकर अकेले ही लगे रहे। उन्होंने इस कार्य को प्रशंसनीय ढंग से निभाया। सभा के एक अन्य सदस्य डॉ. बी. पट्टा सीतारमैया ने भी कहा था कि डॉ. आंबेडकर देश के उच्च स्तरीय देशभक्त और संसार के कानून एवं संविधान के ज्ञाता भी है।
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डॉ. निर्मल ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर संविधान सभा की राष्ट्रध्वज समिति के सदस्य भी रहे। अशोक चक्र और और चरखा पर बहस के दौरान डॉ. आम्बेडकर ने सारनाथ के अशोक चक्र की व्यवहारिकता, दार्शनिकता, कलात्मकता और श्रेष्ठता पर विचार व्यक्त किए। डॉ. आंबेडकर के तर्कों को स्वीकार करते हुए 22 जुलाई 1947 को राष्ट्र ध्वज के लिए अशोक चक्र को स्वीकार किया गया। 

उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर को सम्मान देने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा में 26 नवंबर को संविधान दिवस पर विशेष सत्र आहूत किया जा रहा है। महासभा के अध्यक्ष रामनरेश चौधरी ने कहा कि हमारे समाज को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने के लिए बाबा साहेब ने भारतीय संविधान दिया। 


सेमीनार में डॉ. सत्या दोहरे, अमरनाथ प्रजापति, अब्दुल नसीर नासिर, राजीव श्रीवास्तव, सीपी अरुण, जगदीश प्रसाद ने भी विचार रखे। संचालन बीना मौर्या ने किया।

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