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खुलासा: पराग को कंगाल कर बंद कराने की साजिश

Sun, 08 Nov 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 08 Nov 2015 12:16 AM IST
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Conspiracy against Praag.

लखनऊ दुग्ध संघ यानी पराग को कंगाल करके बंद करने की साजिश रची गई है। इसके लिए घाटे में चल रहे चार दुग्ध संघ सीतापुर, हरदोई, उन्नाव व रायबरेली का पराग में विलय कर एक क्लस्टर बनाने की तैयारी है।

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क्लस्टर बनने से घाटे में चले रहे दुग्ध संघों के कर्मियों के वेतन एवं रिटायरमेंट का बोझ पराग को उठाना पड़ेगा जिससे वह दिवालिया हो जाएगा। ऐसा होते ही पराग सहित सभी दुग्ध संघों को निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा।
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पांच दुग्ध संघों का क्लस्टर बनाने के लिए शुक्रवार को गन्ना संस्थान में एक अधिवेशन बुलाया गया जिसमें संघ के अध्यक्षों एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों ने शासन के फैसले को खारिज कर दिया। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि हरदोई, सीतापुर, उन्नाव व रायबरेली के चार दुग्ध संघ 21 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे हैं।
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क्लस्टर बनने पर इन संघों के जो कर्मचारी एवं अधिकारी रिटायर होंगे उनके देयों के भुगतान का दायित्व पराग को उठाना पड़ेगा। आमदनी कम, खर्च अधिक होते ही पराग कंगाल हो जाएगा।

दरअसल, सभी दुग्ध संघों में हर महीने कुछ कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं जिन्हें करोड़ों रुपये देने पड़ रहे हैं। जिन दुग्ध संघों को पराग से जोड़ने की तैयारी चल रही है, उनके रिटायर हुए कर्मियों को अब तक कई देयों का भुगतान नहीं किया गया है।

पराग पर निजी दूध कंपनी की नजर

Conspiracy against Praag.

एक निजी दूध कंपनी की पराग पर पहले से नजर लगी हुई है। लखनऊ में पैर पसार रही यह कंपनी पराग का अस्तित्व खत्म करने पर आमादा है। घाटे के दुग्ध संघों का क्लस्टर बनते ही पराग खुद बंद हो जाएगी। इसके बाद लखनऊ मंडल में कोई सहकारी दुग्ध संघ नहीं बचेगा। फिर निजी कंपनियां मनमाने दाम पर किसानों से दूध खरीद कर बेचेंगी।

आनन-फानन में जीएम दिनेश कुमार को हटाया
शासन ने लखनऊ दुग्ध संघ को क्लस्टर बनाने का विरोध करने पर शुक्रवार को रातों रात संघ के महाप्रबंधक दिनेश कुमार को हटा दिया। उनका स्थानांतरण कन्नौज दुग्ध संघ में करके यहां जीएम रह चुके एसके प्रसाद को चार्ज दिला दिया गया।

शासन के अनुसार दिनेश कुमार का स्थानांतरण संस्था हित में किया गया है। लेकिन अंदरखाने खबर यह है कि लखनऊ दुग्ध संघ के कुछ लोगों ने शासन को गुपचुप सूचना दी कि दिनेश कुमार शासन के फैसले को प्रभावी करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

इसी नाते उनका तबादला करने के बाद शुक्रवार को ही कार्यमुक्त कर दिया गया और शनिवार सुबह एसके प्रसाद ने जिम्मेदारी संभाल ली।

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