फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Congress surrenders infront of SP in Lagislative Council election.

राहुल की कांग्रेस का ये कैसा 'सरेंडर', पार्टी कैडर हैरान!

Mon, 19 Jan 2015 02:01 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 19 Jan 2015 02:01 AM IST
विज्ञापन
Congress surrenders infront of SP in Lagislative Council election.

कांग्रेस का सपा के लिए यह सरेंडर आने वाले समय में उस पर भारी न पड़ जाए। राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता तक इस बात की आशंका जता रहे हैं।

विज्ञापन


सपा सरकार के प्रति कांग्रेस का यह समर्पण ही है कि उसने विधानसभा में 28 विधायक होने के बावजूद विधान परिषद चुनाव में अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया जबकि सपा ने मात्र छह व भाजपा ने नौ अतिरिक्त विधायकों के भरोसे ही एक-एक उम्मीदवार ज्यादा उतार दिए हैं।
विज्ञापन


प्रदेश कांग्रेस के इस समर्पण की पार्टी के बाहर ही नहीं बल्कि भीतर भी निंदा हो रही है। राजनीतिक जानकार कांग्रेस के इस कदम को गलत ठहरा रहे हैं। अंदरखाने सपा व कांग्रेस की दोस्ती इससे पहले भी देखी गई है। यही वजह है कि कांग्रेस कभी भी प्रदेश सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन नहीं कर पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले वर्ष जब प्रदेश सरकार ने बिजली दरों में बेतहाशा वृद्धि की तो कांग्रेस इसे मुद्दा नहीं बना पाई। उसने विरोध के नाम पर बस खानापूरी ही की। दोस्ती की वजह से ही गन्ना किसानों के मुद्दे पर भी कांग्रेस सपा का खुलकर विरोध नहीं कर पाती।

बेतुका तर्क दे रहे हैं कांग्रेसी

Congress surrenders infront of SP in Lagislative Council election.

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अमीर हैदर कहते हैं कि हमने सपा से ‘गिव एंड टेक’ (एक हाथ दो-दूसरे हाथ लो) का रिलेशन बना लिया है। सपा ने दो बार राज्यसभा में कांग्रेस उम्मीदवार को भेजने में मदद की है। इसलिए इस बार कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा।

असरदार नेता अपने फायदे के लिए पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्हीं के कारण पार्टी आज गर्त में पहुंच गई है। आज हम सरकार के साथ खड़े हैं तो कल सड़कों पर उसकी नीतियों का विरोध कैसे कर पाएंगे ? इसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ेगा। कार्यकर्ताओं का मनोबल भी इससे गिर रहा है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी वर्मा भी इस कदम को सही नहीं ठहराते। वे कहते हैं कि ‘...ऊपर वाले क्या सोचते हैं इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन जहां तक मेरा मानना है तो परिषद चुनाव में प्रत्याशी खड़ा न करके हमने चूक की है।’

इसका बड़ा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई पदाधिकारी भी इस फैसले को पार्टी के लिए घातक मान रहे हैं। हालांकि पद व पार्टी से बंधे होने के कारण वे खुलकर कुछ बोल नहीं रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया।

कहीं 2017 में गठबंधन की तैयारी तो नहीं

Congress surrenders infront of SP in Lagislative Council election.

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एसके द्विवेदी कांग्रेस व सपा की इस दोस्ती को भविष्य का गठबंधन मानकर देख रहे हैं। वे कहते हैं कि कांग्रेस संगठनात्मक रूप से काफी कमजोर दल है।

भाजपा के नरेंद्र मोदी का हौव्वा सबको दिख रहा है। सपा भी मानती है कि वह अकेले भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकती। इसलिए कांग्रेस व सपा विधान परिषद के बहाने 2017 का विधानसभा चुनाव देख रही हैं। इसलिए अंदरखाने दोनों पार्टियां खिचड़ी पका रही हैं।

प्रमोद व पुनिया सपा की मदद से पहुंचे राज्यसभा
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी व पीएल पुनिया सपा की ही मदद से राज्यसभा सांसद बने हैं। तिवारी जब खड़े हुए तब सपा ने अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा। बगैर चुनाव के ही वह राज्यसभा पहुंच गए। पूर्व नौकरशाह पुनिया भी सपा की मर्जी से राज्यसभा पहुंचे हैं।

इनका नामांकन कराने वरिष्ठ मंत्री अंबिका चौधरी साथ में गए थे। उन्होंने समर्थन का ऐलान भी किया था। पुनिया भी बगैर चुनाव के राज्यसभा पहुंच गए। दो बार एहसान ले चुकी कांग्रेस अब तीसरी बार विधान परिषद में अपना प्रत्याशी खड़ा न करके सपा को समर्थन देने जा रही है।

युवा नेता बोले, पार्टी में सिर्फ चापलूसों की चल रही

Congress surrenders infront of SP in Lagislative Council election.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी भी पार्टी के इस कदम से निराश हैं। वह कहते हैं, यूपी में कांग्रेस संगठन को लेकर न तो आलाकमान गंभीर है, न प्रदेश की लीडरशिप। इसलिए इस तरह के फैसले होते हैं।

पार्टी जब सरकार के साथ खड़ी होगी तो सड़कों पर किस मुंह से विरोध करने जाएगी। अपने फायदे के लिए पार्टी का भट्ठा बैठाया जा रहा है। केवल चापलूसों की चल रही है। कार्यकर्ता निराश हो चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed